खबरों के पीछे की दुश्‍वारियों की कहानी है 'स्‍पेशल रिपोर्ट'

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स्‍पेशल रिपोर्ट पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करने वाले हर रिपोर्टर के मन में यह अभिलाषा होती है कि वह अपने कैरियर में कुछ ऐसी खबरें जुटाए जिसकी देश-दुनिया में चर्चा हो. इस तरह की रिपोर्ट तैयार करने में रिपोर्टर को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. पाठक अखबारों-न्यूज चैनलों पर ऐसी रिपोर्ट देखता-पढ़ता है पर उसके पीछे की गई मेहनत से अनजान रहता है.

युवा पत्रकारों व खासकर पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए यह जानना सुखद होगा कि पत्रकारिता जगत में जो कुछ ऐसी खास रिपोर्ट आई, जिनकी गूंज लम्बे समय तक सुनी गई और जिसने अपनी अमिट छाप छोड़ी. इनको तैयार करने में संबंधित रिपोर्टर को कितनी मेहनत करनी पड़ी और वे उस स्टोरी तक कैसे पहुंचे. ऐसी ही 13 बेहतरीन रिपोर्ट व उसके लिए रिपोर्टर द्वारा की गई मेहनत की कहानी को वरिष्ठ पत्रकार भुवेंद्र त्यागी ने अपनी पुस्तक स्पेशल रिपोर्ट में समाहित किया है.

नवभारत टाइम्स (मुंबई) में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत त्यागी पत्रकारिता शिक्षा से भी जुडे हुए हैं. इस लिए वे पत्रकारिता के छात्रों की जरूरतों को भी बखूबी समझते हैं. सौम्य प्रकाशन द्वारा प्रकाशित 156 पेज की इस पुस्तक में जनसत्‍ता के वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय की उस स्पेशल रिपोर्ट की कहानी है जिसने भारतीय राजनीति में भूचाल ला दिया था. श्री स्‍पेशल रिपोर्टराय ने विस्तार से बताया है कि वे किस तरह जैन हवाला कांड की खबर तक पहुंचे. छत्‍तीसगढ़ में नक्सल ग्रस्त इलाके में खबरों के लिए जान जोखिम में डालने वाले युवा फोटो पत्रकार जावेद इकबाल ने नक्सलग्रस्त इलाके की ऐसी सच्ची तस्वीर पेश की है जिसे पढ़ कर सरकार की करनी और कथनी का अंतर समझ में आता है.

'स्पेशल रिपोर्ट'  में आईबीएन7  के वरिष्ठ पत्रकार प्रबल प्रताप सिंह को गुजरात दंगों के समय कवरेज में आई दुश्‍वारियों का भी अच्छा वर्णन है. एनडीटीवी के उमाशंकर सिंह की वह रिपोर्ट लम्बे समय तक दर्शकों के जेहन में रही, जिसमें उन्होंने बुंदेलखंड इलाके में पानी के लिए हुई हत्या की कहानी पर फोकस किया था. पुस्तक में उमाशंकर की इस स्पेशल रिपोर्ट की दास्तान भी दर्ज है. मुंबई में हाल के कुछ वर्षों से परप्रांतीय का मुद्दा काफी गरम है. मुंबई के स्वतंत्र पत्रकार शेखर देशमुख ने उत्‍तर प्रदेश के गांवों में जाकर यह जानने-समझने की कोशिश की कि आखिर इस इलाके के लोगों को अपना घरवार क्यों छोडऩा पड़ता है. इस दौरान देशमुख कई मार्मिक कथाओं से रुबरु हुए और उसे पाठकों तक पहुंचाया. देशमुख ने 'स्पेशल रिपोर्ट' में अपने यह अनुभव सुनाए हैं.

इसके अलावा पुस्तक में टीवी पत्रकार प्रभात शुंगलू द्वारा कारगिल युद्ध की रिपोर्टिंग, पाकिस्तान दौरे के समय प्रकाश दुबे को मिली ओसामा बिन लादेन के लापता होने की खबर, अपनी बेहतरीन फीचर स्टोरी के लिए लाखों दर्शकों के दिल में जगह बना चुके एनडीटीवी के रवीश कुमार की बिहार के कोसी नदीं में आने वाली बाढ़ से मचने वाली तबाही संबंधी रिपोर्ट के पीछे की कहानी को पढऩा काफी रोचक है. मीडिया जगत में अकसर ऐसा होता है जब किसी खबर पर हो हल्ला मचता है तो बयान देने वाले राजनेता व दूसरे सेलिब्रेटी यह कहने से नहीं चूकते कि रिपोर्टर ने मेरी बात को तोड़-मरोड़ कर पेश किया. इससे संबंधित रिपोर्टर को अपने संस्थान में जवाब देना मुश्किल हो जाता है.

कुछ ऐसा ही हुआ था मुंबई की वरिष्ठ पत्रकार नीता कोल्हटकर के साथ. मशहूर गायिका लता मंगेशकर के घर के सामने बनने वाले पेडर रोड फ्लाईओवर का मामला काफी चर्चा में रहा है. इस प्रस्तावित फ्लाईओवर के विरोध को लेकर लता दीदी काफी मुखर हो गई थी. उन्होंने नीता से बातचीत में यह बात कही थी पर बाद में डीएनए में नीती की यह स्टोरी छपने के बाद लता दीदी ने यह कह कर नीता का दिल तोड़ दिया कि मेरी नीता से कोई बात नहीं हुई. नीता को अपनी सच्चाई जाहिर करने के लिए किस तरह भागदौड़ करनी पड़ी, इसका उन्होंने 'स्पेशल रिपोर्ट'  में विस्तार से उल्लेख किया है.

लेखक विजय सिंह कौशिक नवभारत, मुंबई में वरिष्‍ठ संवाददाता हैं.


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