पंकज सुबीर का कथा संग्रह ज्ञानपीठ से प्रकाशित

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पंकज सुबीरभारतीय ज्ञानपीठ ने नवलेखन पुरुस्कार योजना के तहत वर्ष 2008 के तीन श्रेष्ठ युवा कथाकारों में कहानीकार, कवि, पत्रकार और ब्‍लागर पंकज सुबीर को भी शामिल किया है। सुबीर का कथा संग्रह 'ईस्ट इंडिया कम्पनी' भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित होकर आ गया है। भारतीय ज्ञानपीठ ने तीन कहानी संग्रह प्रकाशित करने हेतु देश भर के युवा कहानीकारों से पांडुलिपियां आमंत्रित की थीं। इनमें पंकज सुबीर, बिमल चंद्र पांडेय और मनोज पांडेय का चयन किया गया। सुबीर मध्य प्रदेश के सीहोर के निवासी हैं।

पंकज सुबीर के कथा संग्रह में 15 कहानियां हैं। 'ईस्ट इंडिया कम्पनी' के अलावा अन्य कहानियां हैं- कुफ्र, अंधेरे का गणित, घेराव, आंसरिंग मशीन, हीरामन, घुग्घू, तस्वीर में अवांछित, एक सीप में, ये कहानी नहीं है, रामभरोस हाली का मरना, तमाशा, शायद जोशी, छोटा नटवरलाल, और कहानी मरती है। 'ईस्‍ट इंडिया कम्‍पनी' उस मानसिकता की कहानी है जिसमें उंगली पकड़ते ही पहुंचा पकड़ने का प्रयास किया जाता है। 'कुफ्र' में धर्म और भूख के बीच के संघर्ष का चित्रण किया गया है।

'अंधेर का गणित' में समलैंगिकता को कथावस्‍तु बनाया गया है तो 'घेराव' और 'रामभरोस हाली का मरना' में सांप्रदायिक दंगे होने के पीछे के सच को बताया गया है। 'आंसरिंग मशीन' व्‍यवस्‍था द्वारा प्रतिभा को अपना गुलाम बनाने की कहानी है। 'हीरामन' ग्रामीण कथा संग्रहपरिवेश पर आधारित है। 'घुग्‍घू' के केंद्र में नारी शरीर है। 'तस्‍वीर में अवांछित' एक ऐसे पुरुष की कहानी है जो कि अपनी व्‍यस्‍तता के चलते अपने ही परिवार में अवांछित होता चला जाता है। 'एक सीप में तीन लड़कियां रहती थीं' में एक घर में रहने वाली तीन बहनों की कहानी है जो एक-एक कर  हालात का शिकार होती हैं।

'ये कहानी नहीं है' साहित्‍य क्षेत्र में चल रही गुटबंदी और अन्‍य गंदगियों पर प्रकाश डालती है। 'तमाशा' एक लड़की के अपने उस पिता के विद्रोह की कथा है जो उसके जन्‍म के समय उसे छोड़कर चला गया था। 'शायद जोशी' मनोवैज्ञानिक कहानी है। 'छोटा नटवरलाल' कहानी समाचार चैनलों द्वारा समाचारों को लेकर खेले जाने वाले घिनौने खेल को उजागर करती है। 'और कहानी मरती है' के पात्र कहानी से बाहर निकल-निकल कर लेखक से लड़तें हैं और उसे कटघरे में खड़ा करते हैं।

भारतीय ज्ञानपीठ ने लोकोदय ग्रन्‍थमाला के तहत इसे प्रकाशित किया है। इस ग्रन्‍थमाला के संपादक वरिष्‍ठ कथाकार रविन्‍द्र कालिया हैं। पंकज सुबीर http://subeerin.blogspot.com नाम से एक ब्लाग भी चलाते हैं। उनसे This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it के जरिए या फिर 09977855399 के माध्यम से संपर्क किया जा सकता है।


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