इंटरनेट से चोरी करके डा. दुबे ने लिख डाली किताब

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दो साल पुरानी बात याद आ रही है, जब बक्सर के डा. रविकांत दुबे ने बराक ओबामा पर एक किताब लिखने का दावा किया था, और उस खबर को भोजपुरिया डॉट कॉम ने छापा था। भोजपुरिया डॉट कॉम पर खबर आने के बाद रवि कांत दुबे ने उस खबर को दिखा कर टाइम्स ऑफ इंडिया, दैनिक जागरण और ना जाने कितने अखबारों और वेबसाइटों पर अपना नाम चमकाया था।

उसी वक्त मेरे एक मित्र ने एक सवाल किया था कि आखिर बक्सर जैसे जगह पर बैठा एक व्यक्ति, जो ओबामा तो दूर, ओबामा के कुत्ते से भी कभी नहीं मिला हो, वो आखिर बराक ओबामा पर 320 पन्नों की किताब कैसे लिख सकता है? पिछले महीने जब एक शोध पत्रिका में छपा रवि कांत दुबे का आलेख दूसरों की वेबसाइट से कॉपी/पेस्ट किया हुआ मिला, तो फिर हमारी टीम इस किताब (The hero of Changing World : Barack Obama) की तहकीकात में लग गई, और जैसा कि हमें पहले ही संदेह था, किताब पूरी तरह इंटरनेट से कॉपी/पेस्ट कर बनाई गई है। जी हाँ, अगर आप बडा लेखक बनना चाहते हैं, तो दिन-रात माथपच्ची करने, या किसी विषय पर शोध करने की कोई आवश्यकता नहीं है। आपको सिर्फ एक विषय चुनना है, और गूगल के सर्च बॉक्स में उसे लिख देना है, उसके बाद जो भी रिजल्ट आये, उसे कॉपी कर के किसी प्रकाशक को भेज देना है। किताब छप कर आ जायेगी, और इसके बाद अखबार वालों को बुला कर अपने आप को "दुनिया भर में प्रसिद्ध लेखक" घोषित करा देना है। बन गये आप लेखक, अब 2-4 नेताओं को उसी अखबार की कटिंग दिखा कर इतना सम्मोहित कर देना है कि वो अपने नेतृत्व के सामने आपका महिमामंडन कर सकें, और आपको एक सरकारी संस्था की कुर्सी मिल सके।

जब इस विषय में हमने एक वरिष्ठ साहित्यकार से बात की, तो उन्होंने कहा कि अगर आपके नाम के आगे प्रोफेसर या डाक्टर जैसे तमगे लगे हों, तो फिर कोई आप पर शक भी नहीं कर सकता, और इसी बात का फायदा डा. दुबे ने उठाया। अमेरिका के कई प्रसिद्ध वेबसाइटों और पत्र-पत्रिकाओं में बराक ओबामा पर छपे आलेखों को कॉपी कर के बनाई गई इस किताब का परिचय (कवर पर लिखा गया) तक प्रसिद्ध अखबार "द हिन्दू" के संपादकीय से चुराया गया है, और किताब की प्रस्तावना भी "द हिन्दू" और "द सिडनी हेराल्ड" समेत अन्य वेबसाइटों से चुराई गई है। अनगिनत अखबारों और अमेरिकी सरकार की कई वेबसाइटों से सामग्री चुराकर कोई कैसे अपने को लेखक बता रहा है, यह बात सुनने में जितनी हास्यास्पद लगती है, उतना ही डा. दुबे के चरित्र को भी उजागर करती है।

किताब

इस किताब में कुछ रेफरेंस जरुर दिये गये हैं, लेकिन वरिष्ठ अधिवक्ता श्री बी. सिंह के अनुसार रेफरेंस और कॉपी/पेस्ट में अंतर होता है - "रेफरेंस किए जा रहे आलेख से आप कुछ प्रेरणा ले सकते हैं, लेकिन कॉमा/फुल स्टॉप के साथ किसी भी आलेख को कॉपी करना कानूनन अपराध है। अगर दूसरों के आलेख को कॉपी/पेस्ट कर के कोई किताब लिखता है, तो यह गंभीरतम अपराध की श्रेणी में आता है, और इसमें कॉपीराइट एक्ट के तहत लेखक और प्रकाशक के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।"

किताब

आपकी जानकारी के लिए यहाँ किताब के पहले 2-3 पन्ने और उसे जिस वेबसाइट से चुराया गया है, उसका लिंक दिया जा रहा है। हमारी टीम ने इस किताब के हर पन्ने को इंटरनेट पर तलाश लिया है, और अगर किसी को किसी भी पन्ने के बारे में कोई संदेह हो, तो वो पेज नम्बर के साथ हमसे संपर्क कर सकता है, और हम वह पेज और इंटरनेट पर जिस वेबसाइट से वह पन्ना कॉपी किया गया है, उसका पता दे देंगे। यह तो हुई बराक ओबामा के उस किताब की कहानी, जिसके झाँसे में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक आ चुके हैं। जिन दो अन्य किताबों के कथित लेखक हैं डा. दुबे, उसकी पड़ताल भी हमारी टीम शुरू कर चूकी है, जिसकी हकीकत भी बहुत जल्द ही दुनिया के सामने होगी। सच और झूठ, इमानदारी और चोरी की इस लड़ाई में आप किसके साथ हैं?

प्रवीण सिंह

09356315559


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