साइबर क्राइम पर हिंदी में पहली पुस्‍तक

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हिंदी में विधि सम्बंधित अच्छी पुस्तकों का हमेशा अभाव माना जाता रहा है और खास कर ऐसे विषयों पर, जिसमे तकनीकी मामले भी शामिल हों, तो लगभग नहीं के बराबर पुस्तकें मिलती हैं. आज जब चारों तरफ इन्फार्मेशन टेक्नोलोजी और साइबर जगत की धूम मची हुई है, हम पाते हैं कि हिंदी में इस विषय में सही जानकारी देने वाली पुस्तकें जल्दी नहीं मिलती.

इसमें भी साइबर क्राइम के विषय पर तो शायद ही कोई पुस्तक हो. इस दृष्टि से यूपी के आईपीएस अधिकारी अमिताभ, इलाहाबाद के अधिवक्ता मोहम्मद हसन जैदी और बरेली के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर अमित सिंह द्वारा लिखित और एलिया ला एजेंसी, इलाहाबाद द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'साइबर क्राइम'  का अपना ही महत्व है.

इस पुस्तक में जहां कम्प्यूटर और इन्टरनेट की शुरुआती जानकारी दी गयी है वहीँ भारत में साइबर विधि के अंतर्गत सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000, सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम 2008,  भारतीय साक्ष्य अधिनियम में इलेक्ट्रानिक साक्ष्य एवं इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर को ले कर किये गए संशोधन एवं अन्य सम्बंधित नियमों की विस्तृत जानकारी दी गयी है.

इसके अलावा साइबर क्राइम के विभिन्न प्रकारों, जैसे वित्तीय अपराध, बौधिक सम्पदा अपराध, साइबर मानहानि, साइबर कूटरचना, ऑनलाइन जुआ, साइबर अश्लील लेखन, वेब जैकिंग, वेब डिफेसमेंट, साइबर आतंकवाद आदि की जानकारी भी प्रस्तुत है. इसी के तहत मोबाइल फोन से किये गए साइबर अपराध पर भी विस्तार में चर्चा की गयी है. हैकिंग, साइबर स्टॉकिंग, साइबर स्टेग्नोग्राफी आदि का भी विषद विश्लेषण है. इंटरनेट पर व्यक्ति की वाक-स्वतंत्रता, एकान्तता तथा गुप्तता के उल्लंघन एवं साइबर पोर्नोग्राफी को भी विस्तार में समझाया गया है.

भारत के बाहर किये गए साइबर अपराधों में जिम्मेदारी, कंपनियों द्वारा किये गए साइबर अपराधों की जिम्मेदारी तथा सेवादाता के उत्तरदायित्व का भी वर्णन है तथा साइबर अपराध की विवेचना एवं अन्वेषण को समझाया गया है. इन सबके अलावा साइबर अपराध के रोकथाम के उपाय भी बताए गए हैं. कुल मिला कर यह पुस्तक हिंदी भाषी प्रत्येक ऐसे व्यक्ति के लिए उपयोगी है जो किसी भी तरह से साइबर अपराध और साइबर विधि से तालुख रखता है.

डा. नूतन ठाकुर की रिपोर्ट.


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