जंगल और आदिवासियों पर लिखी किताब का लोकार्पण

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पुस्तक विमोचनहाशिए पर पड़े लोगों का उन्नयन किसी भी सजग नागरिक के लिए चिंता का विषय है। समाजशास्त्री के लिए यह चुनौती है कि वह इन लोगों के लिए बेहतरी का मार्ग समाज और व्यवस्था को सुझाए। सुप्रसिद्ध समाजशास्त्री प्रो. नरेश भार्गव ने उक्त विचार उदयपुर के माणिक्यलाल वर्मा श्रमजीवी महाविद्यालय में आयोजित एक गोष्ठी में व्यक्त किए।

समाजशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित इस गोष्ठी में प्रो. भार्गव और कोटा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो.एम.एल. कालरा ने प्रो. सुरेशचन्द्र राजोरा की अंकुर प्रकाशन द्वारा सद्य प्रकाशित पुस्तक ‘फोरेस्ट मैनेजमेंट स्ट्रेटजी एंड ट्राइबल सोशल स्ट्रक्चर’ का लोकार्पण भी किया।

प्रो. भार्गव ने कहा कि दलितों-आदिवासियों के लिए बनाई जाने वाली नीतियों का अध्ययन और समीक्षा भी समाजशास्त्री का दायित्व है जिसे प्रो. राजोरा ने अपनी पुस्तक में बखूबी निभाया है। प्रो. एम.एल. कालरा ने पुस्तक के संदर्भ में भौगोलिक परिवर्तनों की वैज्ञानिक व्याख्या करते हुए कहा कि पारंपरिक देशज ज्ञान का फिर से उपयोग इस दिशा में सकारात्मक होगा। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. एन.के. पंड्या ने आदिवासी जीवन से संबंधित अपने अनुभव सुनाते हुए कहा कि आदिवासी समाज ने जंगल का उपयोग करते हुए भी पर्यावरण संतुलन कायम रखा।

इससे पहले विभागाध्यक्ष प्रो. पी.सी. जैन ने अतिथियों का स्वागत किया। पुस्तक परिचय हिन्दी प्राध्यापक डा. पल्लव ने दिया। लेखक डा. राजोरा ने पुस्तक लिखने की प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए कहा कि राजस्थान के आदिवासी समुदाय के संदर्भ में नीतियों का पुनर्विश्लेषण बेहद जरूरी है। संयोजन डा. निलेश भट्ट ने किया और अंत में डा. एस. के. मिश्रा ने आभार माना। गोष्ठी में मानविकी संकाय अध्यक्ष प्रो. एस.एन. अय्यर, सामाजिक विज्ञान संकाय अध्यक्ष प्रो. पी.आर.व्यास, प्रो. गिरिश नाथ माथुर, डा. बी.मूमिन, डा. सुनिता सिंह सहित विभिन्न विभागों के प्राध्यापक उपस्थित थे।

 


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