भाषायी पत्रकारिता की 7 शोध पुस्तकों का विमोचन

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किताबों का विमोचन

लक्ष्मीकांत शर्मा बोले- आज भी पत्रकार योद्धा हैं : मध्य प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा एवं जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने भोपाल में गुरुवार को माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय द्वारा स्वतंत्र भारत की भाषायी पत्रकारिता पर प्रकाशित सात शोध पुस्तकों का लोकार्पण किया। श्री शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद आज भी पत्रकार योद्धा के रूप में काम कर रहे है। पत्रकारिता के क्षेत्र में मेधावी विद्यार्थी आ रहे हैं। पत्रकारिता का भविष्य भावी पीढ़ी के हाथों सुरक्षित रहेगा, इसमें कोई संदेह नही है। शर्मा ने कहा कि पूंजी का जमाना है, व्यवसायिक दृष्टिकोण है, इसके बाद भी पत्रकार चुनौतीपूर्ण ढंग से अपना दायित्व निभा रहे हैं।

उन्होंने शोध परियोजना में अध्ययन और शोध को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति अच्युतानंद मिश्र और परियोजना के निदेशक विजयदत्त श्रीधर को बधाई दी। शर्मा ने शोध करने वाले पत्रकारों का पुष्पहारों से स्वागत करते हुए प्रकाशित पुस्तकों की प्रति भेंट की। उन्होंने दैनिक भास्कर समूह के समन्वय संपादक सोमदत्त शास्त्री सहित सुंधाशु मिश्रा, मनोज कुमार, शिव अनुराग पटेरिया, सुश्री अचला मिश्र, रामभुवन सिंह कुशवाह और सुश्री सत्यासिंह राठौर को पुस्तकें भेंट की। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार महेश श्रीवास्तव ने कहा कि यह शोध पुस्तकें पत्रकारों की भावी पीढ़ी को मार्गदर्शन प्रदान करेंगी। विशिष्ट सोमदत्त शास्त्री को पुस्तक भेंट करते लक्ष्मीकांत शर्माअतिथि प्रोफेसर रमेशचन्द्र शाह ने कहा कि साहित्य एवं पत्रकारिता का घनिष्ठ संबंध है। मूल्यमूढ़ता के इस युग में ये पुस्तकें पत्रकारिता में गौरवपूर्ण अंग्रेजों की परंपरा से भावी पीढ़ी को अवगत करायेंगी और चुनौतियों का मुकाबला करते हुए उन्हें सफल बनाने में फलदायी होंगी।

विश्वविद्यालय के कुलपति अच्युतानंद मिश्र ने कहा कि शोध परियोजना के अन्तर्गत बंगला, तमिल, तेलगू और उर्दू पत्रकारिता के इतिहास की पांडुलिपि तैयार हो गयी है। हिन्दी पत्रकारिता का शब्दकोष, संदर्भकोष और वर्तनीकोष प्रकाशित किया जा चुका है। लगभग 100 बड़े संपादकों के मोनोग्राफ प्रकाशित किये जा रहे हैं। कार्यक्रम में जनसंपर्क सचिव मनोज श्रीवास्तव भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के इन प्रयासों से पत्रकारिता का प्रामाणिक इतिहास बनेगा जो पत्रकारिता की भावी पीढ़ियों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव ओ.पी. दुबे ने अपने विचार व्यक्त किये। कुलसचिव पी.एन. साकल्ले ने आभार व्यक्त किया।

गुरुवार को जो पुस्तकें लोकार्पित की गई हैं उनमें दैनिक भास्कर समूह सहित साप्ताहिक हिन्दुस्तान, धर्मयुग, दिनमान, रविवार आदि पत्रिकाओं और समाचार पत्रों का अध्ययन कर शोध पुस्तकें प्रकाशित की गयी है। भोपाल गैस त्रासदी और मीडिया विषय पर भी शोध पुस्तक प्रकाशित की गयी है। योद्धा पत्रकारों के व्यक्तित्व और कृतित्व पर शोध पुस्तकों की श्रृंखला में गणेश शंकर विद्यार्थी, माखनलाल चतुवेर्दी और रामवृक्ष बेनीपुरी पर पुस्तकों का भी प्रकाशन किया गया है। स्वतंत्र भारत में खेल पत्रकारिता पर भी शोध कर पुस्तक का प्रकाशन किया गया है। इन सभी पुस्तकों का विमोचन किया गया।

इस अवसर पर नई दुनिया के संपादक उमेश त्रिवेदी, स्थानीय संपादक गिरीश उपाध्याय, स्वदेश के संपादक राजेन्द्र शर्मा, सतना भास्कर के संपादक राकेश चौधरी, उपसचिव जनसंपर्क विभाग लाजपत आहूजा, जनसंपर्क संचालनालय के अपर संचालक सुरेश तिवारी, पुष्पेन्द्रपाल सिंह, वरिष्ठ पत्रकार सोमदत्त शास्त्री, रामभुवन सिंह कुशवाह, शिवअनुराग पटेरिया, मनोज कुमार, अरूण पटेल, पंकज पाठक विजय मनोहर तिवारी, दीपक तिवारी, ब्रजेश राजपूत, महेन्द्र गगन, सरमन नगेले, साहित्यकार राजेन्द्र जोशी, बटुक चतुर्वेदी, रमेश चंद्र दुबे सहित सैकड़ो पत्रकार, साहित्यकार उपस्थित थे। 


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