सम्राट अशोक की मां धमार पर किताब

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वाणी प्रकाशन से एक किताब आई है 'पाटलीपुत्र की सम्राज्ञी' नाम से. इसके लेखक हैं शरद पगरे. 695 रुपये की यह किताब सम्राट अशोक की मां धमार पर केंद्रित है. विश्व एवं भारतीय इतिहास के पहले महान सम्राट अशोक मौर्य को सम्राट किसने बनाया? महान बनने के लिए उसके व्यक्तित्व का निमार्ण किसने किया?

महानता के गुण उसे किसने प्रदान किए? निश्चय ही उसकी मां को इसका श्रेय जाना चाहिए. उसकी मां ने पृष्ठभूमि में रहकर महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई. वे थी अशोक की मां धमार. धमार चम्पा के एक गरीब दरिद्र ब्राह्मण की अपूर्व, अद्वितीय एवं अनिंद्य सुन्दरी बेटी थी. उसके पिता ने पाटलिपुत्र जाकर उसे सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के पुत्र युवराज बिन्दुसार को भेंट में दे दिया. सप्त खण्डीय सुगांगेय राजप्रसाद के अन्तःपुर में पहुंचने पर षड्यन्त्रपूर्वक उसे अंगमर्दन करने वाली नाऊन बना दिया गया. भाग्य के देवता और उसके रूपलावण्य ने उसे सम्राज्ञी के पद पर पहुंचाया.

नाइन से सम्राज्ञी के पद पर पहुंचने की यात्रा के बारे में इतिहास के पास कोई जानकारी नहीं होने से वह चुप है. धमार न केवल रूप सुन्दरी थीं वरन गुणसुन्दरी भी थीं. उसके रूपगुणों से प्रभावित हो सम्राट बिन्दुसार ने धमार को ‘सुभद्रांगी’ (शुभ अंगों वाली) के विरूद से विभूषित किया था. नूरजहां और इन्दिरा गांधी के समान धमार ने भी अपने समकालीन मौर्य साम्राज्य और राजनीति की शतरंज पर जो चालें चलीं, उन्हीं के परिणामस्वरूप उनका बेटा महाराज कुमार अशोक सम्राट बन पाया. बचपन से ही अपनी मां से प्रियदर्शी पुत्र अशोक को जो शिक्षा मिली उसी के कारण कालान्तर में वह अपनी लोककल्याणकारी नीतियों के कारण ‘देवानाम प्रिय’, ‘प्रियदर्शी’ बन सका.

रूपसी धमार के अवदान के बारे में इतिहास चुप है. इतिहास की चुप्पी को तोड़ उसे वाणी देने का प्रयत्न ऐतिहासिक उपन्यासकार शरद पगारे की कलम ने साहित्य के काल्पनिक यथार्थ के माध्यम से किया है. साधारण गरीब ब्राह्मण कन्या से नाइन, नाइन से सम्राज्ञी बन मौर्य राजनीति को अपनी कोमल कलियों सी अंगुलियों पर नचा, अपने बेटे को सम्राट बनाने की रोचक, रूमानी तथा मनभावन कहानी शरद पगारे ने प्रस्तुत की है. धमार की प्रिय सहेलियों—वागीश्वरी और सुज्वला माने राजनर्तकी विशाला की अंतरकथा व्यथा भी है. साथ में है अशोक और विदिशा की वणिक सुन्दरी देवी की प्रणयकथा. मौर्य कालीन इतिहास के उस महत्त्वपूर्ण कालखण्ड के जनजीवन का आकलन भी किया गया है. 


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