रिटायर हो गए वीरेनदा

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वीरेनदावीरेन डंगवाल उर्फ वीरेनदा बरेली कालेज से रिटायर हो गए. 30 जून का दिन वीरेन डंगवाल के लिए कई मायनों में न भूलने वाला रहा. एक तो यह कि उनका उनके प्यारे बरेली कालेज से कई दशकों का सीधा नाता टूट गया. अब भावनात्मक रिश्ता ही रहेगा. और, इसी 30 जून के दिन वीरेन दा ने अपने शहर बरेली में पहली बार कविता पाठ किया. गर्मी की छुट्टियों के कारण 30 जून को बरेली कालेज बंद रहा, सो, वीरेन डंगवाल के रिटायरमेंट पर कोई आयोजन नहीं किया जा सका.

या, यों कहिए कि बरेली कालेज को अपने इस मशहूर कवि व सम्मानित प्रोफेसर के रिटायरमेंट का दिन याद नहीं रहा. जो भी हो, पर इस दिन आयोजन हुआ, बरेली कालेज के बिना. वीरेन डंगवाल के रिटायरमेंट से परे. इसमें शामिल हुए वीरेन डंगवाल. आनंद स्वरूप वर्मा, असद जैदी, शीतला सिंह, इब्बार रब्बी जैसे अपने घनिष्ठ दोस्तों की मौजूदगी में मानवाधिकार पर हुए एक कार्यक्रम में कविता पाठ भी हुआ. वीरेन डंगवाल ने बरेली के अपने दोस्त और बरेली कालेज के शिक्षक बलदेव साहनी की मृत्यु पर लिखी गई कविता 'मरते हुए दोस्त के लिए' का पाठ किया. 'दुश्चक्र में श्रष्टा' और 'उजले दिन जरूर' का भी पाठ किया.

शाम के वक्त अपने दोस्तों आनंद स्वरूप वर्मा, इब्बार रब्बी, असद जैदी के साथ वीरेनदा ने बरेली में घूम-टहल, खा-पी और हंसी-ठट्टा कर अपने रिटायरमेंट को इंज्वाय किया. अतीत के पन्ने पलटे तो वर्तमान पर बातचीत की. भविष्य के सपने बुनना बंद नहीं किया. लगता है आपने एक पड़ाव पार कर लिया, पूछने पर वे कहते हैं- 'अब तो पड़ाव ही पड़ाव है बेटे, बड़ा चूतियापा है जीवन का, लंबी-छोटी जिंदगी, जो भी है, कटेगी, तुम लोगों के साथ रहकर कटेगी. मिलेंगे, घूमेंगे, लिखेंगे, सोचेंगे... कट जाएगी बेटे.'

साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय लोग वीरेन डंगवाल से खूब परिचित हैं, पर जो नहीं जानते, उनके लिए ये लिंक हैं, जिस पर क्लिक कर वीरेन डंगवाल के बारे में थोड़ा-बहुत जान सकते हैं-

  1. मेरे अंदर काफी गुस्सा है

  2. पत्रकार महोदय


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