'छिनाल' बोल कर फंस गए वीएन राय

E-mail Print PDF

कुलपति विभूति नारायण के ग्रह नक्षत्र खराब चल रहे हैं. दलित विरोधी होने और चोर गुरुओं को संरक्षण देने जैसे आरोपों से इधर थोड़ी राहत मिली थी कि उन्होंने 'छिनाल' शब्द बोलकर खुद को फिर फंसा लिया है. भारतीय ज्ञानपीठ की साहित्यिक पत्रिका 'नया ज्ञानोदय' ने 'बेवफाई' विषय के शीर्षक के साथ अपने ख़ास अंक में विभूति राय का साक्षात्कार किया था.

इसी साक्षात्कार के कुछ अंश कई अखबारों ने छापे हैं. इसके बाद विवाद शुरू हो गया. रिपोर्ट के मुताबिक महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय महाविद्यालय के कुलपति और लेखक विभूति नारायण राय ने हिंदी लेखिकाओं के बारे में कहा-, "हिंदी लेखिकाओं में एक वर्ग ऐसा है जो अपने आप को बड़ा छिनाल साबित करने में लगा हुआ है."

'शहर में कर्फ्यू' नाम की पुस्तक के लिए विख्यात विभूति नारायण राय भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी हैं और सांप्रदायिकता पर अक्सर लिखते हैं. ताजे विवाद के कारण कई लोग वीएन राय की खलुकर लानत मलानत कर रहे हैं. पूरे प्रकरण के बारे में जनसत्ता और इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबरें इस प्रकार है-

 


 

कुलपति वीएन राय ने लेखिकाओं को कहा 'छिनाल'

आशुतोष भारद्वाज

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति और भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी वीएन राय ने हिंदी की एक साहित्यिक पत्रिका को दिए साक्षात्कार में कहा है कि हिंदी लेखिकाओं में एक वर्ग ऐसा है जो अपने आप को बड़ा ‘छिनाल’साबित करने में लगा हुआ है। उनके इस बयान की हिंदी की कई प्रमुख लेखिकाओं ने आलोचना करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है।

भारतीय ज्ञानपीठ की साहित्यिक पत्रिका ‘नया ज्ञानोदय’को दिए साक्षात्कार में वीएन राय ने कहा है,‘नारीवाद का विमर्श अब बेवफाई के बड़े महोत्सव में बदल गया है।’ भारतीय पुलिस सेवा 1975बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के अधिकारी वीएन राय को 2008 में हिंदी विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया था। इस केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना केंद्र सरकार ने हिंदी भाषा और साहित्य को बढ़ावा देने के लिए की थी।

हिंदी की कुछ प्रमुख लेखिकाओं ने वीएन राय को सत्ता के मद में चूर बताते हुए उन्हें बर्खास्त करने की मांग की है। मशहूर लेखक कृण्णा सोबती ने कहा, ‘अगर उन्होंने ऐसा कहा है तो,यह न केवल महिलाओं का अपमान है बल्कि हमारे संविधान का उल्लंघन भी है। सरकार को उन्हें तत्काल बर्खास्त करना चाहिए।’

‘नया ज्ञानोदय’ को दिए साक्षात्कार में वीएन राय ने कहा है, ‘लेखिकाओं में यह साबित करने की होड़ लगी है कि उनसे बड़ी छिनाल कोई नहीं है...यह विमर्श बेवफाई के विराट उत्सव की तरह है।’ एक लेखिका की आत्मकथा, जिसे कई पुरस्कार मिल चुके हैं, का अपमानजनक संदर्भ देते हुए राय कहते हैं, ‘मुझे लगता है इधर प्रकाशित एक बहु प्रचारित-प्रसारित लेखिका की आत्मकथात्मक पुस्तक का शीर्षक हो सकता था ‘कितने बिस्तरों में कितनी बार’।’

वीएन राय से जब यह पूछा गया कि उनका इशारा किस लेखिका की ओर है तो उन्होंने हंसते हुए अपनी पूरी बात दोहराई और कहा, ‘यहां किसी का नाम लेना उचित नहीं है लेकिन आप सबसे बड़ी छिनाल साबित करने की प्रवृत्ति को देख सकते हैं। यह प्रवृत्ति लेखिकाओं में तेजी से बढ़ रही है। ‘कितने बिस्तरों में कितनी बार’ का संदर्भ आप उनके काम में देख सकते हैं।’

वीएन राय के इस बयान पर हिंदी की मशहूर लेखिका और कई पुरस्कारों से सम्मानित मैत्रेयी पुष्पा कहती हैं, ‘राय का बयान पुरुषों की उस मानसिकता को प्रतिबिंबित करता है जो पहले नई लेखिकाओं का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं और नाकाम रहने पर उन्हें बदनाम करते हैं।’ वे कहती हैं, ‘ये वे लोग हैं जो अपनी पवित्रता की दुहाई देते हुए नहीं थकते हैं।’ पुष्पा कहती हैं, ‘क्या वे अपनी छात्रा के लिए इसी विशेषण का इस्तेमाल कर सकते हैं? राय की पत्नी खुद एक लेखिका हैं। क्या वह उनके बारे में भी ऐसा ही कहेंगे।’ पुष्पा, वीएन राय जैसे लोगों को लाइलाज बताते हुए कहती हैं कि सरकार को उन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाना चाहिए।

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति के इस बयान को ‘घोर आपराधिक’ करार देते हुए ‘शलाका सम्मान’ से सम्मानित मन्नू भंडारी कहती हैं, ‘वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। एक पूर्व आईपीएस अधिकारी एक सिपाही की तरह व्यवहार कर रहा है।’ वे कहती हैं कि वे एक कुलपति से वे इस तरह के बयान की उम्मीद नहीं कर सकती हैं। भंडारी कहती हैं, ‘हम महिला लेखकों को नारायण जैसे लोगों से प्रमाण पत्र लेने की जरूरत नहीं है.'

(जनसत्ता से साभार)

 


 

Women Hindi writers vying to be seen as prostitutes: V-C

Ashutosh Bhardwaj

In an interview to a prominent Hindi journal that hit the stands yesterday, the Vice-Chancellor of Mahatma Gandhi International Hindi University (MGIHU) has said “there is a race among women writers to demonstrate they are the greatest prostitute”, leading to demands for his resignation.

The entire “feminist discourse has reduced to a grand celebration of infidelity”, Vibhuti Narain Rai told Naya Gyanodaya, which is published by Bharatiya Jnanpith — that confers the prestigious Jnanpith award.

A 1975-batch IPS officer of Uttar Pradesh cadre, Rai was appointed V-C of MGIHU in 2008. The Central university was set up to promote Hindi language and literature.

Accusing him of being intoxicated with power, women writers have demanded that Rai be sacked. “If he has said so, it’s an insult not only to women, but the violation of our Constitution. The government should immediately sack him. He doesn’t deserve to be the V-C of such a noble institution,” prominent writer Krishna Sobti said.

“Lekhikaon men hod lagi hai yeh sabit karne ki ki unse badi chhinal koi nahi hai... Yeh vimarsh (Feminist discourse) bewafai ke virat utsav ki tarah hai,” Rai says in the interview.

In a derogatory reference to a noted woman writer whose autobiography won accolades, he goes on to say: “Mujhe lagta hai idhar prakashit ek bahu-promoted aur overrated lekhika ki aatmkathamak pustak ka shirshak ‘Kitne Bistaron Men Kitni Baar’ ho sakta tha. (The title of a recently published autobiography of a highly promoted and overrated writer could be ‘How Many Times in How Many Beds’).”

At another place in the interview, he dubs the character of a famous story as “nymphomaniac kutiya”.

Asked by The Sunday Express which women writers he was referring to, Rai laughed. And repeated what he had said: “It’s not fair to take names, but you can see, this tendency to prove themselves the ‘sabse badi chhinal’ is growing among women writers. You can find the references of ‘kitne bistaron men kitani baar’ in their work.”

According to award-winning writer Maitreyi Pushpa, Rai’s remarks reflect the mindset of men who first try to take advantage of budding women writers and then lash out when unsuccessful. “It’s they who pass judgments on their chastity,” says Pushpa, adding: “Does he use the same adjective for his girl students? Rai’s wife is also a writer. Where does he slot her?” Pushpa feels men such as Rai are “lailaaj (can’t be cured)”. “The government should immediately ban them.”

Calling the V-C’s remarks “hugely offensive”, Shalaka Samman winner Mannu Bhandari said: “He has lost all his senses. A former IPS is behaving like a street constable.”

Saying she didn’t expect such comments from a V-C, Pushpa adds: “We women writers don’t need certificates from people like Narain. So far men governed the women discourse, now when we want to come up, they are frustrated at the breakdown of patriarchal society. What can be expected of a police officer intoxicated with power?”

(इंडियन एक्सप्रेस से साभार)


AddThis