छिनाल प्रकरण : ...थू-थू की हमने, थू-थू की तुमने...

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ज्ञानपीठ की प्रवर परिषद से हटा दिए जाने, केंद्रीय मंत्री से माफी मांग लेने और सार्वजनिक तौर पर अपने कहे पर खेद जताने के बाद भले ही विभूति नारायण राय का 'छिनाल प्रकरण' ठंडा पड़ता दिख रहा हो लेकिन इसकी टीस अब भी ढेर सारे लोगों के मन में है. खासकर कई महिलाएं इस बवाल और विवाद के तौर-तरीके से आहत हैं. इनका मानना है कि विभूति नारायण राय ने जो कहा, उससे उनका छोटापन दिखता है, लेकिन विरोध करने वालों ने कोई बड़प्पन नहीं दिखाया.

विरोध करने वाले कई लोगों ने जिस भाषा का इस्तेमाल किया, उससे उनकी कुंठित मानसिकता का पता चलता है.  पटना से लीना (संपादक, मीडिया मोर्चा) ने एक कविता भड़ास4मीडिया के पास मेल से भेजा है, जिसे आप पढ़कर उनकी भावना महसूस कर सकते हैं. -एडिटर

विभूति राय प्रकरण की नजर एक छोटी सी कविता

-लीना-

थू- थू की हमने
थू- थू की तुमने
जिसे मिला मौका
गाली दी उसने
ऐसे संस्कारहीनों को
हटाओ
नजर से गिराओ।
पर धिक्कारते धिक्कारते
भूल गए हम
अपनी भी धिक्कार में
वैसी ही भाषा है
वैसे ही संस्कार
जिसके लिए तब से
उगल रहे थे अंगार।।


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