करकरे पर लिखी गई किताब पर मुकदमा

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: पूर्व आईजी ने लिखी है यह किताब : हालिया रिलीज एक किताब  'हू किल्‍ड करकरे? द रियल फेस ऑफ टेरिरिज्‍म इन इंडिया' अपने विवादित कंटेंट की वजह से सुर्खियों में है. मुंबई  पर हुए  आतंकवादी हमले के घटनाक्रमों पर लिखी गई पूर्व आईजी एसएम मुशर्रिफ की इस किताब पर मुकदमा दर्ज हुआ है. नवी मुंबई निवासी एन्‍वे सतपुते ने पूर्व आईजी मुशर्रिफ और किताब को पब्लिश करने वाली कंपनी फैरोस मीडिया एंड पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ याचिका दायर की थी.

एन्‍वे की तरफ से उनके वकील प्रशांत मग्‍गू ने नवी मुंबई के प्रथम श्रेणी मजिस्‍ट्रेट की अदालत में अपनी शिकायत दर्ज कराई. जिसमें मुशर्रिफ की किताब पर आपत्ति जताते हुए आईपीसी की धारा 115, 116, 117A, 123,  124A, 153, 153A, 153B, 505, 505(2), 506, r/w 34, राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून तथा मकोका के तहत मुकदमा दर्ज कराने की मांग की गई थी.

कोर्ट में बहस के दौरान प्रशांत मग्‍गू ने कहा कि किताब में लिखी गई बातों से निश्चित ही राष्‍ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचेगा. इसमें लिखे गए वक्‍तव्‍य दुश्‍मनी को बढ़ावा देंगे. धर्म और जातियों के बीच नफरत और घृणा की भावना पैदा होगी. इस किताब में इंटेलिजेंस ब्‍यूरो, भारतीय न्‍यायिक प्रणाली और भारत सरकार के गलत आरोप लगाए गए हैं.

अधिवक्‍ता मग्‍गू ने कहा कि किबात अफवाहों और सनसनी फैलाने वाले समाचारों को बढ़ावा देने वाला है. यह किताब जानबूझकर दो समुदायों के बीच दुश्‍मनी की भावना को बढ़ाने, भय पैदा करने तथा इसे पढ़ने वालों के दिमाग में देश विरोधी गतिविधियों की भावना जगाने के लिए लिखी गई है.

याचिका पर बहस होने के बाद माननीय कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 156(3) के अन्‍तर्गत मामले की जांच कर के पुलिस को पूर्व आईजी एसएम मुशर्रिफ और बुक पब्लिशर कंपनी के खिलाफ उपरोक्‍त धाराओं में मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया.


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