ये हाल है हरियाणा साहित्य अकादमी का

E-mail Print PDF

: नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां : सेवा में, श्री भूपेंद्रसिंह हुड्डा, मुख्यमंत्री व हरियाणा साहित्य अकादमी अध्यक्ष, चंडीगढ़, विषय: साहित्यकार सम्मान चयन में हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा अपने ही नियमों की धज्जियां उड़ाना. महोदय, अनुरोध है कि हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा अपने बनाए गए नियम-उपनियमों को अपने ही पांवों के नीचे बुरी तरह से रौंदा गया है। नतीजतन हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा हर साल सम्मानित किए जाने वाले साहित्यकारों के चयन के बारे में निर्धारित शर्तों में विशेष शर्त अकादमी के सूचना पत्र के पेज ७ पर प्रकाशित का उल्लंघन किया गया है. कैसे, इसे बताते हैं.

1. अकादमी के सम्मान से सम्मानित लेखक के नाम पर दूसरे सम्मान के लिए तीन साल के अंतराल के बाद ही विचार किया जाएगा। सम्मान प्राप्त साहित्यकार अन्य सम्मान के लिए प्राप्त पुरस्कार के समकक्ष व उससे कम पुरस्कार राशि के सम्मान के लिए पात्र नहीं होगा।

अब देखें किस तरह से नियम को उड़ा दिया गया। सत्यपाल गुप्ता को भाषा विभाग, हरियाणा (अब साहित्य अकादमी) द्वारा सर्वोच्च सूर पुरस्कार से सम्मानित किए जाने के बावजूद अब विशेष साहित्य सेवी (पहले पुरस्कार से कम) सम्मान से नवाजा गया है। वहीं डा. जयनारायण कोशिक दिल्ली, श्री भारत भूषण सांघीशल, रोहतक व श्रीमती शकुंतला ब्रजमोहन चंडीगढ़ को पहले प्रदान किए गए सम्मान के समकक्ष (बराबर) को फिर से सम्मानित करके अकादमी ने अपने ही नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं।

2. मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार के निर्देशानुसार अकादमी द्वारा निर्धारित हरियाणा अधिवासी की परिभाषा के नियम 6 के (ख) (सूचना पत्र के पेज 2) के अनुसार-जिन्होंने किसी दूसरे राज्य के अधिवासी होने का कोई लाभ प्राप्त नहीं किया है।

लगभग दो साल पहले डा. चंद्र त्रिखा को पंजाब का अधिवासी होने के नाते पंजाब सरकार द्वारा शिरोमणि हिंदी साहित्यकार के रूप में सम्मानित किया गया था। अब हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा अपने ही नियम की अनदेखी करके विशेष साहित्य सेवी सम्मान से सम्मानित किया गया है। डा. त्रिखा किसी भी परिभाषा के आधार पर हरियाणा अधिवासी नहीं हैं।

3. लाला देशबंधु गुप्त सम्मान से सम्मानित श्री हेमंत अत्री की पुस्तक के रूप में एक भी पेज प्रकाशित नहीं है। श्री अत्री की आयु 36 वर्ष है। इनसे अच्छे साहित्यक पत्रकार हैं जिन्हें छोड़ दिया गया है। इनमें केशव चंद्र वधावन चंडीगढ़, श्री कृष्णगोपा विद्यार्थी बहादुरगढ़. श्री मनमोहन गुप्ता मोनी चंडीगढ़ और श्री विष्णु सक्सेना पिंजौर की उपेक्षा की गई है।

4. श्री ताराचंद प्रेमी का कोई प्रकाशित साहित्य नहीं है फिर भी अकादमी द्वारा विशेष साहित्य सेवी बना दिया गया है।

5. डा. शशि भूषण सिंहल, दिल्ली को विशेष साहित्य सेवी सम्मान से सम्मानित किया गया है जबकि श्री सिंहल अकादमी की हरियाणा अधिवासी की परिभाषा क अनुसार हरियाणा अधिवासी नहीं है।

(1) मुख्यमंत्री जी यह केवल कुछ उदाहरण भर हैं हरियाणा साहित्य अकादमी पुरस्कारों में क्या-क्या गुल खिला रही है यह आपके ध्यान में नहीं है। अकादमी के अध्यक्ष होने के नाते इस तरह की गड़बडिय़ों का आपको पता होना चाहिए।  अगर पता नहीं चल सका है कि आप उक्त मामलों की जांच कराएं और दोषी लोगों पर उचित कार्रवाई करें ताकि अकादमी की साख को बट्टा न लगे। आपसे अनुरोध है कि इन सभी तथ्यों की जांच कराई जाए और इनसारे काले कारनामों के लिए अकादमी निदेशक की जिम्मेदावरी तय की जाए।

(2) अकादमी निदेशक को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए ताकि राज्य के बुद्धिजीवियों में व्याप्त रोष कम हो सके।

(3) हरियाणा साहित्य अकादमी को पहले की तरह शिक्षा विभाग के अधीन ही किया जाए।

सादर

दौलत सिंह चौहान

1 नवंबर, 2010


AddThis