कार्टूनों की दुनिया : सहजता के साथ गंभीरता

E-mail Print PDF

कार्टून : कार्टूनिस्‍ट पवन की किताब प्रकाशित : कार्टून के बिना आधुनिक पत्रकारिता बेमतलब सा प्रतीत होता है। हर समाचार पत्र राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक या यों कहें हर पहलुओं पर घटित दैनिक घटनाओं को जहां खबर बनाते हैं। वहीं, खबर को कार्टून के जरिए भी पाठकों के सामने रखते हैं। अखबार के पन्नों पर कार्टून ने भी जगह बना ली है। स्तम्भ लेखकों की तरह कार्टूनिस्टों की तूती मीडिया में बोलने लगी है। आरके लक्ष्मण, अबीद सुरती, सुधीर तैलग, इरफान सरीखे कई चर्चित नाम कार्टून की दुनिया में स्थापित हैं। उनमें ही एक नाम है पवन का। बिहार ही नहीं देश के मीडिया में भी युवा कार्टूनिस्ट, पवन की तूती कार्टून की दुनिया में बोल रही है।

मीडिया में पवन के कार्टून खास महत्व रखते हैं, बल्कि पवन के कार्टून ने आज राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्‍तर पर पहचान बना ली है। समाचार पत्रों के अलावा पत्र-पत्रिकाओं के साथ विभिन्न मीडिया इकाइयों में भी पवन के कार्टून छाये हुए हैं। पवन के कार्टूनों ने खास संरचना के बलबूते अपनी पहचान बनायी है। कार्टूनिस्ट पवन अपनी सद्यः प्रकाशित पुस्तक “कार्टूनों की दुनिया” से इन दिनों खासे चर्चे में है। पवन के करीब ढ़ाई सौ से ज्यादा कार्टूनों को लेकर प्रभात प्रकाशन ने इसे पुस्तकबद्ध किया है। पवन ने गंभीर बातों को देशज शैली और सहज शब्दों में अपने कार्टून में जगह दी है।

पवन के कार्टून को देखते ही जबर्दस्त मुस्कान छूट जाती है। पवन के प्रिय पात्रों में लालू प्रसाद शामिल है। पवन के कार्टूनों में बिहार की राजनीतिक हलचल छायी है। पुस्तक का पहला कार्टून पवन के प्रिय पात्र लालू और लालू के प्रतिद्वंदी नीतीश कुमार को लेकर है। पवन के पात्रों में जहां लालू, नीतीश सहित अन्य राजनेता है, वहीं आम आदमी भी शामिल है। कार्टूनों में पवन मगही से लेकर भोजपुरी संवादों को पिरोते हैं। मसलन विधानसभा चुनाव में “लालटेन भुकभुकाय नमः” और “बाबा वेल्नटाइन” और “नये साल के जश्न में शराब पीकर लोटपोट होने वाले को बंदरों” के साथ संवाद करते कार्टून है। पवन के कार्टून जन सुविधाओं पर भी केंद्रित हैं। कूड़ा-कचड़ा और देश की समस्याओं पर पवन ने कार्टूनों को गंभीरता से बनाया है।

“कार्टूनों की दुनिया”  पुस्तक में विधानसभा 2010 चुनाव को लेकर सभी पार्टियों पर पवन के कार्टून हैं। विधानसभा चुनाव के बाद रिजल्ट आने पर राजनीतिक पार्टियों में जो भूचाल आया उसपर पवन के कार्टून एक अलग छाप छोड़ जाते हैं।  पवन ने अपने कार्टून के जरिए मीडिया को भी नहीं छोड़ा है, ब्रेकिंग न्यूज और क्राइम की खबरों को तरजीह देने वाले मीडिया पर पवन ने कार्टून बनाये हैं।

कुल मिला कर पवन की “कार्टूनों की दुनिया” पुस्तक लोटपोट करने के लिए तो है ही साथ ही संदेश भी देता है। सोच पैदा करता है। देश-समाज के प्रति क्या दृष्टिकोण  होना चाहिये, जो नेताओ के साथ साथ आम जनता को भी रास्ता दिखाता हैं।


AddThis