पुस्‍तकों से बढ़ रही है आम लोगों की दूरी

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समाज में आम आदमी की पुस्तकों से बढ़ती दूरी और पढ़ने के प्रति घटती रुचि आज बुद्धिजीवी वर्ग में चिंता का मुख्य विषय बना हुआ है। किसी समय समाज और प्रशासन को सही दिशा दिखाकर इसकी स्थिति को सुव्यवस्थित बनाये रखने वाले साहित्यकार व लेखक को वर्तमान समय में अपने लिए हाशिये पर भी जगह बनाये रखना संभव नहीं हो पा रहा।

स्तरीय पत्रिकाओं का धीरे-धीरे लुप्त होते जाना और समाचार-पत्रों में विज्ञापन से बची जगह में राजनीति, फिल्म, धर्म व अपराध संबंधी ख़बरों के बाद कहीं ऐसा स्थान ही नहीं बचता जहां चिंता और चिंतन की अभिव्यक्ति संभव हो सके और रचनात्मक लेखक को अपनी भावनाएं जनसाधारण तक पहुंचाने के लिए एक मंच उपलब्ध हो पाये।

शहरों से शुरू हो कस्बों तक पहुंच चुकी टीवी संस्कृति ने, जो धीरे-धीरे गाँवों तक अपना पैर पसारने की स्थिति में है, पुस्तकों को न सिर्फ गहरी क्षति पहुंचाई है वरन पढ़ना शब्द अब केवल पाठ्य पुस्तकों तक ही सीमित हो कर रह गया है।

ऐसे में बच्चों के लिए ज्ञाशिम (ज्ञानवर्धक-शिक्षाप्रद-मनोरजंक) की संकल्पना पर आधारित पुस्तकें प्रस्तुत करने वाले लोकप्रिय बाल-विज्ञान लेखक आइवर यूशिएल की इस वर्ष चार पुस्तकें (खेल खेल में गणित -नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली, खेल है गणित - प्रकाशन विभाग, नई दिल्ली, नॉलेज ख़जा़ना भाग-3 एवं सीखो समझो सुलझाओ - किताब घर, नई दिल्ली) प्रकाशित हुई, जिन्हें उन्होनें पुस्तक परिचय दिवस के रूप में मनाकर शहर के जाने माने लेखकों, पत्रकारों व समाज सेवियों के सामने न सिर्फ प्रस्तुत किया वरन पुस्तक और पाठक के बीच बढ़ती खायी की चिन्ताजनक स्थिति पर चर्चा कर इसका समाधान तलाशने के प्रयास की पहल भी की, जिसमें लघु कथा लेखक सुकेश साहनी, नवगीतकार रमेश गौतम, डा. प्रदीप कुमार, सुभाषवादी रंजीत पांचाले, वैज्ञानिक-लेखक डा. मुरारीलाल सारस्वत, स्क्रिप्ट राइटर गुडविन मसीह, तितली बाल पत्रिका के संपादक फहीम करार, विचारक डा. राजेश शर्मा, छायाकार डा. कामरान खान आदि जैसे अपने-अपने क्षेत्र के प्रतिष्ठित व सम्मानित व्यक्ति शामिल रहे।


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