सुचिता मलिक की पुस्‍तक 'मेमसाहिब क्रोनिकल्‍स' का विमोचन

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चंडीगढ़ की सुचिता मलिक की पुस्तक 'मेम साहिब क्रोनिकल्स' का विमोचन आज दिल्ली के उपराज्यपाल तेजेंद्र खन्ना ने किया। यह पुस्तक उनकी  पहली पुस्तक ‘इंडियन मेमसाहिब’ का दूसरा भाग है। लेखिका दिल्ली के श्रीराम कालेज की छात्रा रही हैं और इस समय चण्डीगढ़ के गवर्नमेंट कॉलेज में प्राध्यापक हैं। तेजेन्द्र खन्ना ने लेखिका के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि उनके पहले उपन्यास ‘इंडियन मेमसाहिब’ को पढऩे के बाद लगा था कि जैसे चलती रेलगाड़ी अचानक रूक गई हो। पढ़ने वाले की जिज्ञासा अधूरी रह जाती है कि आगे क्या हुआ। सुचिता मलिक ने उस अधूरेपन को भरने के लिए जो प्रयास किया है, उसके लिए वे बधाई की पात्र हैं।

खन्ना ने कहा कि सुचिता मलिक एक उत्साही लेखिका हैं, जो सामाजिक परिवेश को और इसकी उलझनों को अच्छी तरह समझती हैं। साहिब लोगों की दुनिया और उसके साथ-साथ उनकी मेम साहिबों की दुनिया और सोच को लेखिका ने बहुत बारीकी से समझकर पेश किया है। श्री खन्ना ने कहा कि लेखिका ने बहुत ही सरल तरीके से साहब लोगों यानी बड़े प्रशासनिक अधिकारियों की दिनचर्या, परेशानियों और शानो-शौकत की जिंदगी का चित्र खींचा है। इसके लिए उन्हें अपने पति युद्घवीर सिंह मलिक को नजदीक से देखने का मौका मिला। उन्होंने श्रीमती मलिक की वर्णन शैली की भी सराहना की और कहा कि उन्हें अपना लेखन ज़ारी रखना चाहिए। उनकी पहली पुस्तक के तीन संस्करण निकलने का जिक्र करते हुए श्री खन्ना ने कामना की कि उनकी यह पुस्तक भी वैसी ही सफलता प्राप्त करे।

उपन्यास की लेखिका श्रीमती सुचिता मलिक ने इस अवसर पर कहा कि उनकी दूसरी पुस्तक उनके पहले उपन्यास का ही इतिवृत्त है। इस उपन्यास में साहिब लोगों की मेहनत और जिम्‍मेदारियों से भरी जिंदगी के साथ-साथ अन्य पहलुओं को भी उकेरने की कोशिश की गई है। इस उपन्यास के मुख्‍य पात्र पहले उपन्यास वाले ‘इंडियन मेमसाहिब’ के रघु और सुनयना ही हैं। सुनयना इस उपन्यास की सूत्रधार भी हैं। उपन्यास में बड़े साहिब लोगों की  शानो-शौकत, तनावों, आकांक्षाओं और विशिष्ट व्यक्ति होने के नाते उनकी विशिष्ट शैलियों की झलक मिलती है। घरेलू मोर्चे को संभालने वाली मेमसाहिबें साहिब लोगों की दुनिया में भी पैठ रखती हैं। सुनयना इस सब का हिस्सा होते हुए भी हर चीज को स्वतंत्र नजरिये से पेश करने की कोशिश करती है।

इंडियन एक्सप्रेस के प्रमुख संपादक शेखर गुप्ता ने इस अवसर पर श्रीमती सुचिता मलिक, उनके पति युद्घवीर सिंह मलिक और उप-राज्यपाल तेजेन्द्र खन्ना के साथ अपनी पुरानी यादों का जिक्र किया। सुचिता मलिक की दूसरी पुस्तक के बारे में उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में बड़े प्रशासनिक अधिकारियों की जिन्दगी का झरोखा इस तरह से पेश किया है, जैसे लेखिका उन्हें एक शीशे के घर में बैठे देख रही हो। युद्घवीर सिंह मलिक ने इस मौके पर मौजूद सभी लोगों का धन्यवाद किया। समारोह में बड़ी संख्या में उनके मित्र और अधिकारी मौजूद थे। उनके इस उपन्यास को और इससे पहले के उपन्यास को भी रूपा एंड कंपनी ने प्रकाशित किया है। पुस्तक के प्रकाशक रूपा एंड कंपनी के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी कपीश मेहरा भी समारोह में मौजूद थे।


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