हिंदी संस्‍थान में अध्‍यक्ष एवं निदेशक की नियुक्ति करे राज्‍य सरकार

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: डॉ. नूतन ठाकुर एवं अन्‍य की याचिका पर हाईकोर्ट ने दिया आदेश : डॉ. नूतन ठाकुर के साथ निर्मला राय, डॉ. प्रणव कुमार मिश्रा, राजेंद्र प्रताप सिंह तथा अन्य लोगों द्वारा उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की बदहाल व्यवस्था और पुरस्कारों के प्रति लापरवाहीपूर्ण नज़रिए के दृष्टिगत एक रिट याचिका उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के लखनऊ खंडपीठ में दायर की गयी थी. इसमें प्रतिवादी प्रमुख सचिव भाषा, उत्तर प्रदेश, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान तथा निदेशक, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान बनाए गए. याचिकर्ता के वकील अशोक पाण्डेय हैं.

डॉ. ठाकुर ने बताया कि इस रिट की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय में दो-सदस्यीय पीठ ने राज्य सरकार को यह निर्देशित किया कि वह एक महीने के अन्दर हिंदी संस्थान में पूर्णकालीन कार्यकारी अध्यक्ष एवं निदेशक की नियुक्ति करे. साथ ही शीघ्रातिशीघ्र साधारण सभा तथा कार्यकारिणी समिति गठित करने के निर्देश भी राज्य सरकार को दिए गए हैं. उच्च न्यायालय के सरकारी वकील से यह भी पूछा है कि एक लम्बे समय से पुरस्कार क्यों नहीं दिए जा रहे हैं. मामले में सुनवाई एक महीने बाद होगी, जब उत्तर प्रदेश सरकार को कृत कार्यवाही से अवगत कराने की अपेक्षा की गयी है.

ज्ञातव्य हो कि रिट में डॉ. ठाकुर तथा अन्य द्वारा कहा गया कि यह संस्थान हिंदी भाषा और साहित्य के उन्नयन और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान और प्रौद्योगिकी में राष्ट्रभाषा की वर्तमान भूमिका के दृष्टिगत स्थापना हुई. यह संस्थान 1998 में संशोधित नियमावली से संचालित है, जिसके अनुसार इस संस्थान के पदेन अध्यक्ष उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं. इस नियमावली के नियम 10 के अनुसार साधारण सभा और नियम 12 और 13 कार्यकारिणी समिति के बारे में है.

साथ ही वरिष्ठ साहित्यकारों को सम्मानित करने हेतु प्रतिवर्ष उत्कृष्ट साहित्य सृजन और दीर्घकालीन हिंदी सेवा के लिए भारत-भारती सम्मान, लोहिया साहित्य सम्मान आदि से ले कर प्रवासी भारतीय हिंदी भूषण सम्मान तथा हिंदी विदेश प्रसार सम्मान तक दिए जाने की व्यवस्था है. इस हेतु उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान पुरस्कार नियमावली 1997 बना है, जिसके नियम 4 के अनुसार प्रतिवर्ष ये पुरस्कार दिए जायेंगे.

रिट में कहा गया कि इन नियमों के विपरीत उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान में एक लंबे समय से साधारण सभा और कार्यकारिणी समिति भंग है. इसके साथ ही डॉ. शम्भू नाथ के बाद दिनांक 30/06/2009 से कार्यकारी पूर्णकालीन अध्यक्ष और डॉ. सुधाकर अदीब के बाद 26/04/2010 से निदेशक का पद खाली हैं. इन कारणों से संस्थान के कार्यों पर व्यापक दुष्प्रभाव पड़ रहा है. इसके अलावा हिंदी संस्थान द्वारा नियमानुसार प्रति वर्ष प्रदान किये जाने वाले कई सारे पुरस्कार भी एक लंबे से नहीं दिए गए हैं. साथ ही इस संस्थान को दिए जाने वाले वित्तीय संसाधनों में भी निरंतर कटौती की जाती रही है. 2007-08 तथा 2008-09 के लिए जो प्लान बजट 16 लाख रुपये था, वह 2009-10 में घटा कर दस लाख कर दिया गया था.

इनके आधार पर रिट में डॉ. ठाकुर तथा अन्य ने निवेदन किया कि उत्तर प्रदेश शासन एक निश्चित समय सीमा के अंदर साधारण सभा और कार्यकारिणी समिति का गठन कराये और पूर्णकालीन कार्यकारी अध्यक्ष एवं निदेशक की नियुक्ति करे. यह भी प्रार्थना की गयी कि उत्तर प्रदेश शासन 2008, 2009 तथा 2010 के सभी पुरस्कार उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान पुरस्कार नियमावली के अनुरूप यथाशीघ्र प्रदान करे.


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