अब क्या ख़बरें रोकेगा, अब ख़ुद ही अख़बार हैं लोग

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तहसीन मुनव्वर कवि हृदय हैं. शायर हैं. गज़ल, गीत और शेर लिखते हैं. चंद लाइनों में बहुत कुछ कह देते हैं. तभी तो उनकी थोड़ा लिखा तुरंत बहुत दूर तक पहुंचता है. वे मिस्र की ओर देखते हैं और जो कुछ हो रहा है, उसके आधार पर अपने लोगों से बात करते हैं. मिस्र पर तहसीन मुनव्वर ने जो लिखा है, उसे हम यहां प्रकाशित कर रहे हैं. मुझे उनकी ये लाइनें बेहद पसंद हैं- ''अब अनदेखी मत करना, मरने को तय्यार हैं लोग, अब क्या ख़बरें रोकेगा, अब ख़ुद ही अख़बार हैं लोग''. -एडिटर, भड़ास4मीडिया

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तहसीन मुनव्वर

ग़ज़ल - तहसीन मुनव्वर

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अब तुझ से बेज़ार हैं लोग

ख़ुद अपनी सरकार हैं लोग

अब अनदेखी मत करना

मरने को तय्यार हैं लोग

ज़ालिम रेत का टीला है

लोहे की दीवार हैं लोग

खून है सब की आँखों में

यह न समझ बीमार हैं लोग

अब क्या ख़बरें रोकेगा

अब ख़ुद ही अख़बार हैं लोग

तुझ पर थूक नहीं पायें

कब इतने लाचार हैं लोग

पहले कितने आसां थे

लेकिन अब दुशवार हैं लोग

पहले नींद का ग़लबा था

लेकिन अब बेदार हैं लोग

देख इन्हें हाँ देख ज़रा

हर लम्हा इनकार हैं लोग

तुझ से प्यार नहीं करते

नफरत का इज़हार हैं लोग

तेरा काम ही छीनेंगे

यह जितने बेकार हैं लोग

यह है 'मुनव्वर' की दुनिया

जिसका कुल संसार हैं लोग....

 

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रात को चीरता हुआ जैसे

सुब्ह को आफ़ताब आता है

देखने वाले ग़ौर से देखें

किस तरह इंक़लाब आता है.

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तहसीन मुनव्वर भाई से संपर्क This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it के जरिए किया जा सकता है.


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