एक हजार में बिक गए महासमुंद के पत्रकार!

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छत्तीसगढ़ राज्य का महासमुंद जिला न केवल देश स्तर पर वरन विश्व में सर्वाधिक कुष्ठ रोगियों के लिए चिन्हांकित किया गया। ऐसा हम नहीं स्वास्थ्य विभाग कहता है। इस जिले को कुष्ठ मुक्त बनाने बीते 14 फरवरी से अभियान चल रहा है। मुख्यमंत्री डा. रमनसिंह ने एक मशाल जलाकर जिले के कलेक्टर और स्वास्थ्य अधिकारी के हाथ में सौंपी थी। कुष्ठ मुक्ति का अभियान 7 अप्रैल विश्व स्वास्थ्य दिवस के दिन महाभियान बन गया।

जिला प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत झोंककर जिले के 10 लाख से अधिक रहवासियों का एक ही दिन में कथित तौर पर परीक्षण करा लिया। कहा तो यहां तक जाता है कि इसे बड़ा रिकार्ड बताकर लिमका बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज कराए जाने तक की योजना बनाई गई है। इस महाभियान का कवरेज करने के लिए जिला मुख्यालय महासमुंद के अनेक पत्रकारों को एक-एक हजार रूपए यह कहकर दिया गया कि वे विज्ञापन नहीं दे पा रहे हैं, उन्हें विज्ञापन का कमीशन दे रहे हैं। कुछ सिद्धांतवादी पत्रकारों ने जिला प्रशासन के इस पेशकश को यह कहकर ठुकरा दिया कि उन्हें ऐसा कमीशन नहीं चाहिए।

वहीं ज्यादातर इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया के पत्रकारों ने जिला जनसंपर्क अधिकारी से बड़ी ही बेशर्मी के साथ एक-एक हजार रूपए कमीशन ले लिया। इतना ही नहीं तथाकथित भारत के सबसे बड़े समाचार पत्र समूह के पत्रकार तो इस एक हजार रूपए के बदले जिला प्रशासन का ऋण तीन दिन तक लगातार खबर प्रकाशित कर चुका रहे हैं। तब जनसामान्य के बीच इस बात की जमकर चर्चा हो रही है कि क्या पत्रकार अब बिकने लगे हैं। चंद भारतीय मुद्रा देकर कोई भी कुछ भी करा सकता है। एक ओर जिले को कुष्ठ मुक्त करने अभियान चलाया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को जो कुष्ठ का रोग लग रहा है, उसका उपचार कौन करेगा?

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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