बीबीसी हिंदी में अंदरूनी राजनीति तेज!

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ये चिट्ठी एक मेल के जरिए भड़ास के पास पहुंची है. तथ्यों को वेरीफाई नहीं किया जा सका है. बीबीसी के लोगों से अपील है कि वे इस पत्र में कही गई बातों का खंडन या मंडन करें, नीचे कमेंट बाक्स के जरिए या फिर This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it पर मेल करके. पत्र इस प्रकार है- ''बीबीसी हिंदी की पूर्व सम्पादक सलमा ज़ैदी जो इन दिनों नोटिस पर चल रही है, वे आजकल अपने खर्चे पर लंदन गयी हैं जहाँ उन्होंने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के प्रमुख पीटर होरक्स से अपने साथ हुए अन्याय की बात कही है और इस मामले पर अगले इसी शुक्रवार लंदन के बीबीसी दफ्तर में सुनवाई होनी है.

साथ ही पीटर ने लंदन से एक दिन पहले निकी क्लार्क को दिल्ली भेजा है जिससे यहाँ के दफ्तर का पूरा हाल और ब्यौरा मिल सके. वैस भी श्री अमित बरुआ के खिलाफ शिकायतें दिन पर दिन बढती जा रहीं हैं और पीटर ऐसा कुछ भी नहीं चाहते कि बीबीसी के कर्मचारी कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएं. मुकेश शर्मा जिनकी नौकरी पिछले महीने गयी थी, उन्हें भी पीटर होरक्स से आश्वासन मिल चुका है और मुकेश अभी भी बेनागा दफ्तर आ रहे हैं. इस कदम को लोग श्री बरुआ के लिए एक बड़ा झटका बता रहे हैं. हालांकि अमित बरुआ ने रेहान फज़ल की नौकरी बचाने के बाद उन्हें गुप्त रूप से बीस दिनों की छुट्टी पर भेज दिया था लेकिन रेहान के खिलाफ़ भी अब आवाजें तेज़ हो गयीं है और उन्हें दफ्तर वापस लौटना पड़ा है.

पर सूत्र बता रहे हैं की अमित बरुआ के मुकेश, सलमा और रेनू अगाल को निकालने का फैसला अब पलटा भी जा सकता है क्यूंकि ये तीनों ही लगातार दफ्तर आ रहें हैं और अगले महीने तक के रोस्टर में इनका नाम है. इधर दूसरी तरफ बीबीसी में किसी भी नई नौकरी पर किसी को न रखे जाने के कानून के बाद भी पिछले हफ्ते ऐश्वर्या कपूर को एफएम का रिपोर्टर बनाकर उन्हें दो साल का कान्ट्रेक्ट दे दिया गया है जिस पर सभी को आपत्ति है. माना जा रहा है की कपूर की ये नियुक्ति अमित बरुआ ने रेहान फज़ल के दबाव में की है और आनन् फानन में राकेश सिन्हा ने इनका कान्ट्रेक्ट जारी कर श्री ऐश्वर्या कपूर को सौंप दिया है. खबर की पुष्टि की जा सकती है.''


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