महुआ में डेस्‍क वालों को न बात करने की तमीज है और ना ही खबर की समझ

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आंधी आने पर दीपक तेजी से फ़ड़फड़ाने लगता है जिसके कारण थोड़ी देर के लिये उसकी रोशनी बढ़ जाती है, यही हाल है महुआ न्यूज चैनल का.  रह- रहकर टीआरपी में उछाल आ जाता है और फ़िर लुढ़क जाता है. चैनल में उपर से नीचे तक बैठे लोगों को गाहे-बेगाहे पागलपन का दौरा भी पड़ता रहता है, जिसके कारण भागमभाग की स्थिति बनी हुई है. जिला में काम करने वाले स्ट्रिंगरों की भी स्थिति भी ठीक नहीं है.

जो स्ट्रिंगर शुरुआती दौर में चैनल पर बेहतर खबर भेजने के लिये दिन-रात एक कर रखे थे, वो अब चैनल को तौबा करने की सोच रहे हैं. वजह है डेस्क पर बैठे लोगों की हेकड़ीवबाजी. पिछले दिनों पूर्णिया के स्ट्रिंगर से डेस्क पर फ़ोन रिसीव करने वाला देवेश नाम का लड़का बकवास कर लिया. स्ट्रिंगर ने भी देवेश को ठेठ भाषा में समझा दिया.  इसी बात पर स्ट्रिंगर की छुट्टी कर दी गयी.  अब हाल ये है कि पूर्णिया का कोई स्ट्रिंगर महुआ के तरफ़ झांक भी नहीं रहा है.

कोसी और पूर्णिया प्रमण्डल में महुआ में काम करने वाले सभी स्ट्रिंगर से मेरी बात होती रहती है,  सभी कमोवेश चैनल में बैठे लफ़ंगों से नाराज हैं.  डेस्क पर बैठने वालों को स्ट्रिंगर से बात करने की तमीज नहीं है और ना ही खबर की समझ. दूसरे चैनल पर जिस खबर को प्रमुखता से चलायी जाती है उस खबर को महुआ पर जगह नहीं मिल पाती है. दिन भर न्यूज कवर करने के बाद जब स्ट्रिंगर डेस्क पर खबर बताता है तो खबर भेजने से मना कर दिया जाता है.  ये तो हुई मेहनत पर पानी फ़िरने वाली बात.

चैनल स्ट्रिंगरों का आर्थिक रूप से भी शोषण करने में भी लगा हुआ है. शुरुआती दौर में स्ट्रिंगरों को पांच महीने तक रुपया नहीं दिया गया, जो अब तक लटका हुआ है. कहने के लिये तो चैनल स्ट्रिंगरों को पांच सौ रुपया प्रति स्टोरी देता है,  लेकिन वास्‍तविकता ये है कि एक सौ पचास रुपया प्रति स्टोरी के हिसाब से ही चेक मिलता है. कुल मिलाकर हर महीने स्ट्रिंगरों को तीन से चार हजार रुपया घर से वहन करना पड़ रहा है.

खर्च से बचने के लिये महुआ के स्ट्रिंगर दूसरे चैनल के स्ट्रिंगर के मोटरसाइकिल पर लद कर न्यूज कवर करने के फ़िराक में लगे रहते हैं. न्यूज कवर करने के बाद फ़ीड भेजने के लिये साइबर कैफ़े वालों की चिरौरी करते रहते हैं. हालात अब इस मुकाम तक पहुंच गया है कि कोसी और पूर्णिया प्रमण्डल के सारे स्ट्रिंगर चैनल छोड़ने की तैयारी में जुट गये हैं. फ़िलहाल सभी टाइमपास कर अपना पांच महीने का बकाया भुगतान मिलने का इंतजार कर रहे हैं.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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