दैनिक जागरण, इलाहाबाद में जमकर हो रही ऐड रिवेन्‍यू की लूट

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प्रिय यशवंत जी, दैनिक जागरण, इलाहाबाद के विज्ञापन विभाग में लूट-खसोट का नंगा नाच अपने चरम पर है, जिसमें मैनेजर से लेकर चपरासी तक शामिल हैं. ऐड एजेंसी को मिलने वाले पन्‍द्रह प्रतिशत कमीशन की बन्दरबांट तो होती ही है, इसके आलावा औने-पौने दामों में विज्ञापन की बुकिंग करायी जाती है. सूत्रों की माने तो विज्ञापनदाता से पूरे पेज का 80 से 90 हज़ार रुपये लिया जाता है परन्तु बिलिंग मात्र 30 से 40 हज़ार रूपये में होती है.

शेष राशि की बन्दरबांट विज्ञापन प्रबंधक की शह पर मुंह लगे विज्ञापन एजेंसी के द्वारा होती है. जिसका एक मोटा भाग कानपुर में बैठे एक अधिकारी तक जाता है. विज्ञापन बिना रिलीज आर्डर के एवं बिना विज्ञापन दर निर्धारित किये हुए प्रकाशित कर दिए जाते हैं.  तत्पश्चात पार्टियों से मोटी रकम वसूल कर मनमाने ढंग से रिलीज आर्डर मुंह लगी एजेंसी से लेकर बिलिंग मनमाने दर पर करा दिया जाता है.  मुंह लगी एजेंसी का इस्तेमाल खुले आम किया जा रहा है है.

दैनिक जागरण के वर्करों का स्तर इतना गिर गया है कि देर रात शोक सन्देश प्रकाशित कराने वालों से मनचाही रकम वसूल कर उन्हें 5 से लेकर 15 प्रतिशत कमीशन देने का लालच दिया जाता है, ताकि विज्ञापन उनके जरिये प्रकाशित हो सके और वो अपनी जेब गरम कर सकें. दैनिक जागरण, इलाहाबाद में जितने भी विज्ञापन डायरेक्ट आते हैं उनसे कार्ड रेट वसूल कर विज्ञापन प्रबंधक अपनी मुंह लगी एजेंसी के द्वारा औने-पौने दामों में प्रकाशित करवा देते हैं, और फिर शुरू हो जाता है दौर कमीशनखोरी और बन्दरबांट के नंगा नाच का.

अगर सूत्रों की माने तो 90 प्रतिशत डाइरेक्ट आने वाले विज्ञापन को इस मुंह लगी एजेंसी के रिलीज आर्डर पर ही प्रकाशित किया जाता है. आश्चर्य की बात ये है कि इस एजेंसी का टोटल ऐड रिवेन्यू अन्य सभी अखबारों में सबसे कम है, परन्तु दैनिक जागरण में इस एजेंसी का ऐड रिवेन्‍यू सबसे ज्यादा है. अधिकारियों की मिली भगत से इस एजेंसी के टर्न ओवर के साथ-साथ इयरली इंसेटिंव का लालच देकर मिली भगत की जा रही है. सभी अधिकारियों की आँखों पर पर्दा पड़ा हुआ है, क्योंकि इस कमीशन खोरी और ऐड रिवेन्‍यू की बन्दरबांट में उनके भी हाथ काले हैं.

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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