अमेरिका बड़ा बदमाश है

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दुनिया में सीधे सादे लोग भारी संख्या में हैं, इसी कारण बदमाश सबको उल्लू बनाकर अपना राजकाज चलाते रह पाते हैं. अमेरिका को ही देखिए. लादेन को पाकिस्तान में घुसकर मारा और उसकी लाश को समुद्र में बहा देने के बाद भी वह चैन से नहीं बैठा है. उसे डर है कि कहीं लोग लादेन को साहस व बगावत के नए प्रतीक के तौर पर पूजना न शुरू कर दें इसलिए अमेरिका लादेन को मारने के बाद भी लादेन के पीछे पड़ा हुआ है.

अमेरिकी प्रशासन ने सुनियोजित तरीके से लादेन को बदनाम करने की पालिसी बनाई है और उसे नीच, निकृष्ट व असामाजिक के तौर पर स्थापित करना चाहता है. इसके लिए अमेरिकी प्रशासन ने अमेरिकी मीडिया की मदद से जोरदार अभियान चला दिया है. पांच वीडियोज रिलीज करना भी इसी क्रम में है जिसके जरिए लादेन को बूढ़ा, बेचारा, असहाय, गरीब, उपेक्षित, चिंतित दिखाया जा रहा है. भारत जैसे देशों की मीडिया का भी अमेरिका इस्तेमाल कर रहा है. खासकर न्यूज चैनलों का. ज्यादातर न्यूज चैनल पर आप लादेन के लिए गालियां गाते एंकरों - आवाजों को सुन पाएंगे. डिस्कवरी और फाक्स जैसे चैनलों पर अमेरिका हर रोज करीब चार घंटे लादेन के खिलाफ सुनियोजित प्रोपेगंडा कर रहा है. खास चीज ये कि डिस्कवरी और फाक्स पर ये प्रोग्राम हिंदी में दिखाए जा रहे हैं. वजह यह कि भारतीयों का माइंडसेट अमेरिका और लादेन को लेकर वही रहे, जो अमेरिका चाहता है.

डिस्कवरी और फाक्स हैं तो अमेरिका के चैनल लेकिन ये भारत में भी भारतीय रूप में लंबे समय से प्रकट हैं. लादेन के खिलाफ कुछ भी आंयबांयसांय भारतीय चैनलों पर चल रहा है. डिस्कवरी और फाक्स जैसे चैनलों पर अलकायदा व लादेन के खिलाफ गहन छानबीन वाले और अमेरिकी एजेंडे के अनुकूल कार्यक्रम हिंदी में दिखाए जा रहे हैं. कहीं से कोई सवाल नहीं उठा रहा है इस पर. इस लोकतांत्रिक और पारदर्शी दौर में अमेरिका जैसे देशों का अपनी विचारधारा को मीडिया के जरिए आम जनमानस पर थोपना निंदनीय है. ओसामा बिन लादेन की हत्या पर नोम चोम्स्की की प्रतिक्रिया आप जानना चाहेंगे. पढ़िये, उनकी प्रतिक्रिया ये है- ''हम खुद से यह पूछ सकते हैं कि तब हमारी प्रतिक्रिया क्या होती, जब कोई ईराकी कमांडो जॉर्ज डब्ल्यू बुश के घर में घुस कर उनकी हत्या कर देता और उनकी लाश अटलांटिक में बहा देता.'' अब आप ये मत पूछिएगा कि ये नो चोम्स्की कौन हैं.


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