एसाइनमेंट और आउटपुट की मनमर्जी के खिलाफ गुस्‍सा

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: नये महाब्राह्मणों ने करायी महुआ में मारामारी : यशवंत और भुप्‍पी की जुगलबंदी को लगा करारा झटका : शिकायत मालिकों तक पहुंची, मचा हडकम्‍प : जल्‍दी ही पुराने निष्‍ठावानों की कत्‍लगाह बनेगा महुआ : यशवंत राणा और भूपेंद्रनारायण भुप्‍पी की जुगलबंदी कोई नया मस्‍त राग निकालने के बजाय महुआ में बेसुरा भोंपू बजाने लगी है। अपने लोगों को फिट करने की साजिशों के चलते पुराने लोगों के क्रियाकर्म का रास्‍ता बनने लगा है।

अब हालत यह है कि एसाइनमेंट और आउटपुट के लोग तक असमंजस में हैं कि वे किसे काम सौंपें और किसी नहीं। हर एक बात के लिए नवागंतुक अफसरों का मुंह निहारा जा रहा है। लेकिन हाल ही इसके खिलाफ उठी आवाज जब मालिकों तक पहुंची तो बाजी पलट गयी। फिलहाल खबर है कि बडे अफसर मामला शांत कराने में जुट गये हैं। ताजा खबरों के मुताबिक एसाइनमेंट में तब हडकंप मच गया जब आउटपुट ने साफ कहा कि फलां खबर अब फलां स्ट्रिंगर से ही मंगवाई जाए। तीन खबरों को लेकर महुआ के बांदा, हमीरपुर और उन्‍नाव के स्ट्रिंगरों के पर कतर दिये गये। जिन स्ट्रिंगरों से खबर मंगाने की बात कही गयी वो न्‍यूज 24 के थे। खबर नये स्ट्रिंगरों के नाम पर चलने लगी तो बवाल खडा हो गया।

इन जिलों में महुआ के स्ट्रिंगरों ने इसकी शिकायत अपने कानपुर के इंचार्ज रिपोर्टर मनोज से की। खबर है कि इस पर कडा ऐतराज जताया गया। लेकिन एसाइनमेंट और आउटपुट हेड का काम देख रहे और हाल ही महुआ में भर्ती हुए राणा-भुप्‍पी के करीबी आरसी शुक्‍ला से मनोज की हाट-टाक हो गयी। मनोज का ऐतराज था कि बिना उन्‍हें खबर किये स्ट्रिंगरों को क्‍यों हटा दिया गया। जबकि बातचीत के दौरान वहां मौजूद आउटपुट के अन्‍य स्‍टाफ का कहना था कि आरसी शुक्‍ला ने मनोज को बुरी तरह डांटा और साफ कहा कि अब महुआ में मेरी ही चलेगी। जिसे मैं चाहूंगा, रखूंगा और जिसे चाहूंगा निकाल बाहर कर दूंगा।

इसके अगले ही दिन मारवाह बिल्डिंग में हंगामा खडा हो गया। हुआ यह कि कानपुर के रिपोर्टर मनोज ने इस पूरे मामले पर एक लम्‍बा-चौडा चिट्ठा पीके तिवारी, आराधरा तिवारी वगैरह सभी मालिकों और एचआर तक को कर दिया जिसमें साफ कहा गया था कि उनके साथ आरसी शुक्‍ला ने अभद्रता की और धमकियां दीं, जोकि किसी भी संस्‍थान के लिए शोचनीय है। जब जिसे चाहा, उसे निकाल देना और उनके इंचार्ज को इसकी भनक तक ना लगने देना, उन्‍हें विश्‍वास में नहीं लिया जाना वगैरह हरकतें संस्‍थान में काम कर रहे लोगों का हौसला तोड देंगी। इस मेल के चलते महुआ में हंगामा खडा हो गया। महुआ के भीतरी सूत्र बताते हैं कि मालिकों ने यह मेल यशवंत राणा और भुप्‍पी के साथ ही आरसी शुक्‍ल वगैरह को भी भेजते हुए इसकी कैफियत मांगी।

अब हालत यह है कि महुआ के बडे आला अफसरनुमा पत्रकार इस मामले को सलटाने में जुट गये हैं। सूत्रों पर यकीन करें तो नये आये वरिष्‍ठ लोग इस बात पर एकराय हो गये हैं कि जब तक पूरी तरह महुआ का प्रबंधन उनके हिसाब से उनके लोगों के हाथ में नहीं आ जाता तब तक वे संयम बरतें और वक्‍त की नब्‍ज पहचानने की कोशिशें करते रहें। हालांकि इस रणनीति में पुराने लोगों को किसी न किसी बहाने चलता करने की बात अंतर्निहित है। जाहिर है कि अब खबरों को लेकर मीन-मेख निकालने का दौर शुरू हो चुका है जिसके आधार पर ऐसे लोगों को काली सूची में डाला जा सके। आउटपुट और एसाइनमेंट के लोगों को ऐसे लोगों की ग‍लतियों का शिजरा तैयार करने को कहा गया है।

उधर खबर है कि मालिकों की ओर से अफसरों को भेजे गये ईमेल का कोई खास असर नहीं पडने जा रहा है। सूत्र इसे महज औपचारिकता के तौर पर ही देख रहे हैं। वजह यह कि हरफनमौला की छवि हिमाचल प्रदेश के मुख्‍यमंत्री को ब्‍लैकमेल करने के आरोप में आजतक से निकाल बाहर किये जाने वाले भूपेंद्र नारायण सिंह भुप्‍पी और उनके इशारे पर आये यशवंत राणा की जुगलजोडी ने अपने लोगों को बडे पदों पर भर लिया है और अभी कई और लोगों के महुआ की चहरदीवारी पर काबिज हो जाने की खबरें उरूज पर हैं। अपने दंदफंद के चलते इधर कई मामलों में फंसे पीके तिवारी इन लोगों पर पूरी तरह आ‍श्रित होने पर मजबूर हो चुके हैं। अपने सारे स्‍याह-सफेद कारनामों को निपटाने के लिए भुप्‍पी और राणा की जोडी पर वह पूरी तरह निर्भर हो चुके हैं। जाहिर है कि महुआ अब जल्‍दी ही अपने पुराने और निष्‍ठावानों की कत्‍लगाह में तब्‍दील होने जा रहा हो तो कोई आश्‍चर्य नहीं।


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