रिपोर्टरों के भत्ते में से अपना हिस्सा मांगता है चीफ रिपोर्टर

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इस बाजारू दौर में हर कोई अनैतिक और पतित होने के लिए तत्पर है, क्योंकि पैसा अब सब कुछ हो गया है. न बाप न मइया न भइया, सबसे बड़ा रुपय्या. तभी तो ज्यादातर मीडिया वाले दिन भर लायजनिंग, पीआर और उगाही के खेल में लगे रहते हैं. आश्चर्य तो ये कि अब प्रबंधन भी उन्हीं को बढ़ावा देता है जो पैसा उगाहने, दूहने में माहिर हों.

एक बड़े अखबार के दिल्ली के एक चीफ रिपोर्टर के बारे में खबर आई है कि वे अपने रिपोर्टरों के भत्ते में से अपना हिस्सा मांगता हैं. ये हिस्सा और कुछ नहीं बल्कि रंगदारी टैक्स है. इस बात का टैक्स है कि तुम्हें रिपोर्टर बने रहना है तो अपने पैसे के एक हिस्से को मुझे दो. इस बारे में रिपोर्टर ने पत्र लिखकर प्रबंधन से शिकायत की है. दिक्कत ये है कि रिपोर्टर ने जिससे शिकायत की है, वही चीफ रिपोर्टर को संरक्षण देता है. ऐसे में गाज तो रिपोर्टर पर ही गिरनी है क्योंकि उसने अन्याय के खिलाफ ''आवाज उठाने'' का दुस्साहस किया है. पत्र में जो कुछ कहा गया है, उसे यहां दिया जा रहा है, सिर्फ अखबार का नाम, चीफ रिपोर्टर का नाम और पत्र भेजने वाले का नाम हटा दिया गया है... जरूरत पड़ने पर उसका भी खुलासा किया जा सकता है.. पत्र इस प्रकार है...

सेवा में

यूनिट हेड महोदय

नोएडा

विषय- मुख्य संवाददाता द्वारा जबरन गलत काम कराने पर शिकायत

महोदय,

निवेदन यह है कि आपके द्वारा मुझे एयरपोर्ट बीट का जिम्मेदारी दी गई है, जिसे मैं अपनी कर्मठता व लगन से कवर कर रहा हूं. महोदय, मुख्य संवाददाता जी द्वारा कुछ नए मापदंड तैयार किये गए हैं जिसके तहत एयरपोर्ट बीट पर काम करने में मैं अब अपने को असहज महसूस कर रहा हूं। मुख्य संवाददाता द्वारा कुछ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है, जो संस्थान के खिलाफ है, इस कारण मैं उनका साथ नहीं दे सकता. मैंने उन्हें संकेत भी दिया था ऐसा न करें, लेकिन उन्होंने उस दिन से मुझे परेशान करना शुरू कर दिया. जो काम वह मुझसे आदेश देकर कराना चाहते हैं, वह कार्य नहीं कर सकता. ऐसा करना संस्थान के खिलाफ होगा.

महोदय माफी के साथ कहना चाहता हूं कि मुख्य संवादादाता मुझसे एयरपोर्ट जाने के लिए मिलने वाले भत्ता में से अपना हिस्सा मां रहे हैं और फरवरी माह के भत्ते में से उन्होंने 3000 रुपये भी लिये हैं. मार्च में चूंकि मैंने चेक से भत्ता मंगाया था, इसलिये मैंने उन्हें पैसे नहीं दिये. इसके बाद उन्होंने कई बार मुझसे पैसा मांगा. इतना ही नहीं, दिसंबर व जनवरी माह के बाउचर मेरे से भरवाए गए और उन्हें नोएडा कार्यालय भेजा गया. अप्रैल माह में नोएडा कार्यालय गया, तो अचंभित रह गया कि वह बाउचर एकाउंट विभाग में क्लीयर होने के लिए रखा गया है जबकि मेरे एयरपोर्ट भत्ता की स्वीकृति फरवरी माह से मिली है.

इसके बाद जब मैने वह बाउचर वापस मांगे, तो मुझे नहीं दिये गए. इतना ही नहीं कि एकाउंट में एक अधिकारी ने मेरे सामने तुरंत इस बारे में मुख्य संवाददाता को फोन करके सूचना दी. जिसके बाद मुख्य संवाददाता ने फोन करके इस बारे में किसी से भी चर्चा न करने का आदेश दिया और तुंरत कार्यालय आने को कहा। महोदय, आपसे मेरा विनम्र निवेदन है कि मुझे एयरपोर्ट से हटा लिया जाए, क्योंकि मैं संस्थान के खिलाफ कोई कार्य नहीं कर सकता, जिसके लिए कि मुझे बाध्य किया जा रहा है. महोदय मेरी समझ से यह कार्य संस्थान विरोधी है, जो कि मैं कतई नहीं कर सकता.

भवदीय

xyz


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