पत्रिका में इंक्रीमेंट स्टेट देखकर

E-mail Print PDF

अखबारों में इंक्रीमेंट का सीजन चल रहा है। कुछ अखबारों में इंक्रीमेंट लग गए हैं तो कुछ अखबारों में कहा जा रहा है कि सूची प्रबंधन के पास पहुंचा दी गई है और प्रबंधन से हरी झंडी मिलते ही बढ़ा हुआ वेतन मिलने लगेगा। ग्वालियर में एक साल पहले दस्तक देने वाले पत्रिका समाचार पत्र में इंक्रीमेंट लगते ही कुछ लोगों के चेहरे जहां खिल गए हैं, वहीं कुछ लोग मुंह लटकाए बैठे हैं। असल में पत्रिका में काम करने वालों के तीन गुट हैं।

एक गुट है राजस्थान से आयात किए गए लोगों का। दूसरा गुट है दूसरे राज्यों से आए लोगों का और तीसरा गुट है मध्यप्रदेश खासतौर से ग्वालियर में रहने वालों का। इंक्रीमेंट लगाने में यह देखा गया है कि जिसे इंक्रीमेंट लगाया जा रहा है वह किस राज्य का है। यदि राजस्थान का है तो इंक्रीमेंट ज्यादा लगा है। यदि मध्यप्रदेश का रहने वाला है तो सबसे कम इंक्रीमेंट लगाया गया है।

दूसरे राज्यों से आए लोगों का भी इंक्रीमेंट लगा है पर उन्हें राजस्थान वालों से नीचे पर मध्यप्रदेश वालों से ऊपर रखा गया है। बस इसी बात से उन लोगों में असंतोष है जो कि मध्यप्रदेश के रहने वाले हैं और  इन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि यह अपना दर्द रोएं तो किससे रोएं, क्योंकि प्रबंधन की चाबी भी राजस्थान के लोगों के पास है और वे ग्वालियर-मध्यप्रदेश के लोगों को कोल्हू के बेल से ज्यादा कुछ नहीं मानते।


AddThis