भास्कर के पत्रकारों को पत्रिका में नहीं मिल रहा भाव

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नौ महीने पहले जब पत्रिका ग्रुप ने छत्तीसगढ़ में कदम रखा था तब भास्कर के पत्रकारों को प्राथमिकता के साथ नियुक्त करने वाले पत्रिका ग्रुप की रंगत अब बदल गई है। भास्कर से पत्रिका गए 3 पत्रकारों ने हाल ही में भिलाई में फिर से भास्कर का दामन थाम लिया। इनमें उमेश निवल, आशीष अग्रवाल और प्राकृतशरण सिंह शामिल थे। इससे भास्कर के पत्रकार अब पत्रिका में संदिग्ध नजरों से देखे जा रहे हैं।

इस बीच पता चला है कि भिलाई में पत्रिका को पत्रकारों की कमी हो गई है। इस कमी को पूरा करने तमाम कोशिशें हो रही है। पत्रिका समूह के प्रबंधन से जुड़े लोग ऐसे पत्रकारों की तलाश में जुट गए हैं, जो भिलाई और आसपास के रहने वाले हैं। किंतु, किसी कारणवश दूसरे शहरों में नौकरी करने विवश हैं। ऐसे ही भिलाई के एक सख्श अजय साहू दैनिक भास्कर महासमुंद में कार्यरत हैं। जब भास्कर के पत्रकार अजय को जानकारी मिली कि पत्रिका को पत्रकारों की तलाश है तो वे जुगत लगाकर गृहनगर लौटने और अच्छी सेलरी की उम्मीद लेकर पत्रिका रायपुर कार्यालय और भिलाई कार्यालय का 8-10 चक्कर लगा चुके हैं। पत्रिका की जरुरत को भांपकर पत्रकार मोटी तनख्वाह की मांग कर रहे हैं। पता चला है कि अजय ने 25 हजार रुपए मासिक वेतन की मांग रखी। जिसे पत्रिका प्रबंधन ने सिरे से खारिज करते हुए बाहर का रास्ता दिखा दिया।

पत्रिका के छत्तीसगढ़ में बढ़ते प्रभाव से भास्कर प्रबंधन बेचैन है। भास्कर अपने से जुड़े पत्रकारों और नाराज होकर गए लोगों को अच्छी सेलरी देकर वापस बुलाने का पुरजोर प्रयास कर रहा है। ऐसे में भास्कर के सीनियर पत्रकारों को भी पत्रिका में पहले जैसा भाव मिलना बंद हो गया है। कुछ भी हो भास्कर और पत्रिका के झगड़े में पत्रकारों को ज्यादा वेतन का लाभ जरुर मिल रहा है। चाहे किसी भी संस्थान से मिले।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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