पीपुल्‍स समाचार जबलपुर में संपादक, एनई एवं सिटी चीफ के खिलाफ आक्रोश

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पीपुल्स समाचार जबलपुर संस्करण में इस समय बहुत ही बुरा दौर चल रहा है। स्टाफ पिछले करीब एक साल से वेतन के लिए हर माह 25 तारीख के बाद ही सोचना शुरू करता है। पिछले दिनों पत्रकार ब्रजेश शुक्ल को निकाले जाने और गुरुवार को वरिष्ठ पत्रकार राजेश विश्वकर्मा, फोटोग्राफर चीफ सनत सिंह को निकालने के इरादे से ग्वालियर ट्रांसफर करने के बाद अब पूरे एडिटोरियल में बेहद असंतोष है।

समाचार संपादक राजेश दीक्षित और संपादक जितेंद्र रिछारिया दोनों बेसिकली इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से हैं, इसके चलते उनमें अहंकार इतना ज्यादा है कि वे खबरों की वैल्यू भी नहीं समझते। सतीश शर्मा के साथ तीनों की चंडाल तिकड़ी अपना एकछत्र राज चलाने के लिए सभी गलत-सही तरीके अपना रहे हैं। संपादकीय के सभी पत्रकारों और डेस्क ने फैसला किया है कि अब अगर किसी भी पत्रकार या संपादकीय के किसी कर्मी को निकाला जाता है तो कोई भी उस दिन काम नहीं करेगा और ना ही अखबार प्रकाशित होने दिया जाएगा।

सिटी चीफ सतीश शर्मा भी दोनों के चमचे हैं। उन्हें भी पिछले दिनों संपादकीय के दो साथी थपड़िया चुके हैं। जानकारी तो यहां तक है कि जबलपुर का कोई भी पत्रकार पीपुल्स में किसी भी कीमत पर नहीं आना चाहता। समाचार संपादक राजेश दीक्षित के खिलाफ तो बाकायदा सभी पत्रकारों ने हस्ताक्षर कर मैनेजमेंट तक अपना विरोध खुल कर पहुंचा दिया है। पीपुल्स के पत्रकारों और मार्केटिंग टीम के अधिकांश लोग इंक्रीमेंट घोषित करने के बाद भी नहीं लगाने पर आक्रोशित हैं। संपादक श्री रिछारिया के प्रति तो सभी खार खाए बैठे हैं। उनकी छवि भी बहुत अच्छी नहीं है। सहारा समय में ब्यूरो चीफ रहते हुए उन पर एक करोड़ रुपये से ज्यादा का घपला उजागर होने के बाद सुना है कि सहारा समय उन पर रिकवरी और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराने जा रही है।

बहरहाल आने वाले दिनों में रिछारिया जी, राजेश दीक्षित और उनके सबसे बड़े पैर धोकर चाटने वाले चमचे सतीश शर्मा के खिलाफ किसी भी दिन, किसी भी वक्त कहीं भी मारपीट भी हो सकती है। कई लोग तो उसके हाथ पैर तोड़ने की कसम खा कर बैठे हैं। जानकारी के अनुसार सतीश को रेलवे अफसरों के दलाल के रूप में ही शहर में जाना जाता है। बुकिंग से लेकर ट्रांसफर तक के खेल में सतीश का हिस्सा होता है, इसीलिए अभी तक पीपुल्स में रेलवे के खिलाफ खबरें नहीं छपतीं। इतना ही नहीं असंतोष इतना बढ़ गया है कि यह किसी भी दिन उग्र रुप ले सकता है और अखबार में ताले पड़ने की नौबत आ सकती है, यह तय नजर आ रहा है।

हैरत की बात यह है कि मैनेजमेंट को रिछारिया, राजेश दीक्षित और सतीश जैसे चमचों और अखबारनवीसों के नाम पर बदनुमा दाग इन लोगों का यह धूर्तपन नजर नहीं आ रहा है। यूनिट हेड सुमित शर्मा को भी इन लोग अपनी चमचागिरी से मुगालते में रखकर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। यह बातें सीईओ रूचि विजयवर्गीय को मालूम नहीं हैं, और पहले बजाज, अब रिछारिया उन्हें गलत फीडिंग दे रहे हैं। वे सावधान हो जाएं,  जिन्हें उन्होंने आस्तीन में पाल रखा है, दरअसल वे कोबरा प्रजाति के ऐसे सांप हैं, जिनका काटा पानी नहीं मांगता। कुल मिला कर पीपुल्स समाचार जबलपुर में आखिरी सांसें ले रहा है। इसमें दोबारा जान आ सकती है, बशर्ते यहां की चंडाल तिकड़ी को निकाल बाहर किया जाए।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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