जागरण, आगरा में पानी के लिए कर्मचारियों से वसूली

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देश का नम्‍बर एक अखबार दैनिक जागरण बहुत सारे अभियान चलाता है. अखबार के सरोकारों में जल संरक्षण अभियान भी शामिल है. हर साल इसको लेकर अभियान भी चलाया जाता है और लोकल लेवल पर भी ऐसी खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित किया जाता है. दैनिक जागरण की आगरा यूनिट ने तो इसे इतनी गंभीरता से ले लिया है कि अपने कर्मचारियों को पानी भी नहीं पिलाता.

तीन चार महीनों से यहां के कर्मचारी जब ऑफिस जाते हैं तो अपने लिए पानी का इंतजाम करके जाते हैं. भीषण गर्मी में भी जागरण कर्मी प्‍यास से मरते रहे लेकिन जागरण ने पानी का कोई इंतजाम नहीं किया. कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि भीषण गर्मी में शासन-प्रशासन और सु‍धिजन लोगों को पानी पिलाने के लिए प्‍याउ लगवाते हैं लेकिन उसकी खबर छापने वाले देश के सबसे बड़े अखबार में उसके कर्मचारियों को पानी पीने के लिए अपना इंतजाम खुद करना पड़ता है. पर कोई असर नहीं हुआ. लोग अक्‍सर मजाक भी करते हैं कि जागरण आपके काम का पैसा देता है, पानी आप खुद पीजिए. इन मजाकों के बाद रिजल्‍ट यह निकला कि बाहर से पानी की बीस लीटर वाली बोतल मंगाई जाने लगी, लेकिन जागरण कर्मियों को धक्‍का तब लगा जब कुछ दिन बाद उनसे पानी के नाम पर पैसे की वसूली हुई.

एक तो जागरण, आगरा यूनिट में दो संपादकों की लड़ाई ने वैसे ही जागरण कर्मियों को परेशान कर रखा है, उस पर इस घटना पर सवाल उठाने की हिम्‍मत किसी की नहीं होती. क्‍या पता नौकरी पर तलवार लटक जाए. पानी के नाम पर वसूली अब भी जारी है. जागरणकर्मियों की कामना है कि भगवान संपादकों को सद्बबुद्धि दें ये सोचने की कि किसी को पानी कोई ऐसे ही पिला देता है, जागरण कम से कम अपने कर्मियों के लिए तो पानी की व्‍यवस्‍था कर दे. अब देखिए भगवान इन प्‍यासे कर्मचारियों की आवाज कब सुनता है.


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