'हिंदुस्तान' जैसा बड़ा अखबार स्ट्रिंगरों का बेरहमी से करता है शोषण

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: कई वर्षों से न तनख्वाह और न परिचयपत्र, जैसे तैसे चल रही है इनके जीवन की गाड़ी : ये बात है लखनऊ हिन्दुस्तान यूनिट की, यहाँ हर आदमी परेशान है,  अपने प्रमोशन को लेकर फिक्रमंद है.  स्टाफर की तो चलो ठीक है,  पैसा बढ़ा नहीं तो कुछ लोगों को प्रमोशन देकर काम चल गया,  मगर दिन भर धूप में मोटर साइकिल दौड़ाने वालों व जगह-जगह कवरेज करने जाने वाले इन स्ट्रिंगरों की क्या कोई नहीं सुनेगा?  क्या इन्हें इस संस्थान में काम करने का कोई सिला नहीं मिलेगा?

बेचारे हिन्दुस्तान, लखनऊ के स्ट्रिंगरों की बात करें तो ऐसे ऐसे रिपोर्टर रिपोर्टिंग में हैं,  जिन्हें लखनऊ यूनिट से जुड़े तक़रीबन 2 से 6 साल हों गए हैं,  लेकिन उन्हें मिला क्या इतने सालों से काम करने के बाद?  न किसी का कोई पैसा बढ़ाया गया और न ही परिचय पत्र दिया गया.  सिर्फ काम लिया जाता है गधों की तरह.  चाहे रात हो या दिन और तनख्वाह के नाम पर दिए जाते हैं 2 से 3 हजार रुपए मात्र.  इन मालिकान लोगों ने ये भी नहीं सोचा कि जहाँ एक ओर आम लोग दिन भर में 100 रुपए का पेट्रोल फूंकते है वहीँ इतनी बड़े संस्थान हिन्दुस्तान के स्ट्रिंगरों को महीने भर काम लेने के बाद वेतन के रूप में दिया जाता है  2500 रुपए मात्र.

और तो और इन लोगों के पास हिन्दुस्तान अख़बार में काम करने का कोई प्रमाण भी नहीं है यानी कि परिचय पत्र,  जिसे लेकर आये दिन रिपोर्टरों- फोटोग्राफरों कि किसी न किसी से कहा सुनी होती रहती है और यह सब किस लिए सिर्फ और सिर्फ एक परिचय पत्र के लिए,  इसके बिना इस मीडिया जगत के बड़े संस्थान हिन्दुस्तान जैसे अख़बार के कर्मचारी को बेइज्जत होना पड़ता हैं.  अब तो स्ट्रिंगरों का पैसा बढ़ाइए श्रीमान नवीन जोशी जी और एक-एक परिचय पत्र दीजिये ताकि आपके पत्रकारों की और आपके अख़बार की गरिमा सम्पूर्ण समाज में बनी रहे.  यूँ परिचय पत्र के न होने पर आपके रिपोर्टरों और फोटोग्राफरों को किसी के सामने लज्जित न होना पड़े.

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.


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