बिहार में हिंदुस्तान अखबार के मोडम प्रभारियों का मेहनताना मनरेगा मजदूरों से भी कम!

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जी हां, खबर कुछ चौकाने वाला मगर सच है. ढाई दशक पहले जिस बिहार की मिट्टी में यह अखबार पला-बढ़ा और जवां हुआ. जहां के पत्रकारों ने अपने खून-पसीने से सिंचाई कर शुरू से ही अखबार के नम्बर एक के पोजिशन को बरकरार रखा. और हिन्दुस्तान से एचटी मीडिया व एचएमवीएल की ऊंचाई तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. जिसका मार्केट शेयर व टर्न ओवर अरबों रुपये है.

आज उसी राज्य के कलमकारों का खून चूसने में इस अखबार का कोई हर्ज नही है. स्ट्रिंगरों की बात कौन कहे हिन्दुस्तान दैनिक के माडम कार्यालयों के प्रभारियों को भी नरेगा मजदूरों से कम मेहनताना मिलता है. गौरतलब है कि राज्य में अखबार के तीन यूनिट पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर में स्थित हैं. इन तीनों यूनिट के तहत राज्य के 38 जिलों के माडम कार्यालय संचालित है.

यूनिट मुख्यालयों को छोड़ बाकी के 35 जिलों में ब्यूरो चीफ (स्टाफर्स) की जगह कार्यालय प्रभारी रखे गए हैं. जिनका औसतन वेतन 4000 रुपये है,  मात्र 133 रुपये रोजाना. वहीं राज्य में कुशल नरेगा मजदूर की दिहाड़ी 180 रुपये तय है यानी महीने के 5400 रुपये. अब आप ही बताइए कि पत्रकार के परिवार में कम से कम 5 सदस्य भी होंगे,  तो इस महंगाई में उनका गुजारा कैसे चलता होगा. इन कथित कार्यालय प्रभारियों के लिए प्रेस आई कार्ड, पीएफ, मेडिकल सुविधा तो सपने की चीज है. पते की बात यह है कि इन माडम कार्यालयों में औसतन 10 पत्रकार कार्यरत हैं. इनमें तीन-चार सुपर स्ट्रिंगरों को छोड़कर शेष कई वर्षों से 10 टकिए पर ही खट रहे हैं, इनका हिसाब भी चार-पांच महीने पर ही होता है.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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