जब उमाकांत लखेड़ा को लखैरा मान लिया माता जी ने!

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''सरनेम का भी बड़ा लफड़ा है. कुछ दिनों पहले हमारे शहर (पटना) में पत्रकार उमाकांत लखेड़ा साहब थे. एक शाम मेरे एक मित्र के घर फोन कर दिया- 'हेलो, मैं लखेड़ा बोल रहा हूँ.' फोन पर मित्र की माताजी थीं. मजा आ गया. उन्होंने आव देखा न ताव. बस बरस पड़ी, 'देखिए यह शरीफ आदमी का घर है. यहाँ कोई लखैरा-उखेरा नहीं रहता.' आप जानते हैं, बिहार में 'लखेरा' संदिग्ध चरित्र वाले को कहते हैं.''

फेसबुक पर यह लिखा है डा. राजू रंजन प्रसाद ने. उनसे संपर्क के लिए क्लिक कर सकते हैं- फेसबुक पर डा. राजू रंजन


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