प्रधान संपादक और महिला पत्रकार के संबंधों पर कानाफूसी

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एक अखबार के प्रधान संपादक इन दिनों अपने मीडिया हाउस में चर्चा के विषय बने हुए हैं. अखबार से जुड़े दर्जनों लोगों ने बताया कि प्रधान संपादक अपनी एक हरकत के कारण अपने अधीनस्थों की निगाह से गिर चुके हैं. वाकया कुछ यूं है. अखबार में काम करने वाली एक महिला पत्रकार जब पेज चेक कराने प्रधान संपादक के केबिन में गईं तो प्रधान संपादक कुछ ऐसी हरकत करने लगे जिसे आफिस में उचित नहीं कहा जा सकता. केबिन का गेट पूरा बंद नहीं था, बस यही गड़बड़ हो गई.

कोई दूसरा बंदा जब पेज चेक कराने के मकसद से अंदर घुसने के लिए गेट से झांका तो अंदर का हाल देख वह उल्टे पांव लौट पड़ा. उसने बात कुछ और सहयोगियों को बताई तो लोग एक एक कर केबिन के गेट से चुपके से झांक कर देखने लगे और देखने के बाद लौटने लगे. यह क्रम काफी देर तक चला. चपरासी तक को पता चल गया कि अंदर जो हो रहा है वो ठीक नहीं है. अचानक किसी तरह प्रधान संपादक को एहसास हुआ कि उन्हें लोग देख रहे हैं तो वे सामान्य हुए और यह कहने लगे कि लड़की की तबियत ठीक नहीं है, इसको डाक्टर को दिखाना पड़ेगा. इतना कहकर वह लड़की को अपनी कार में बिठाकर डाक्टर के पास लेकर चले गए.

सूत्रों के मुताबिक लड़की सब कुछ जानते हुए भी चुप थी. संभवतः उसे प्रधान संपादक से अपना रिश्ता स्वीकार था, इसलिए उसने कोई विरोध नहीं किया. उधर, प्रधान संपादक के नजदीकी लोगों का कहना है कि यह कैसा कोई वाकया हुआ ही नहीं है. प्रधान संपादक नरम दिल आदमी हैं और सबका भला करना चाहते हैं. महिला पत्रकार को परेशानी थी, इसीलिए वह उसे डाक्टर के पास दिखाने ले गए. इन नजदीकी लोगों का यह भी कहना है कि प्रधान संपादक को बदनाम करने के लिए संगठित तरीके से अभियान चलाया जा रहा है. कभी किसी बात की अफवाह उड़ा दी जाती है तो कभी किसी अन्य बात की. ऐसी हरकत वे लोग कर रहे हैं जो नहीं चाहते कि उनसे कोई कड़ाई से काम ले.

खैर, बात चाहे जो भी हो लेकिन इस अखबार के हर एक आदमी की जुबान पर इन दिनों प्रधान संपादक का कथित स्कैंडल चर्चा में है. जिस अखबार के प्रधान संपादक के बारे में चर्चा इन दिनों सरेआम है, उस अखबार के लांच हुए ज्यादा वर्ष नहीं हुए हैं. ऐसी खबरों का प्रमाण न होने के कारण यहां संपादक की पहचान और अखबार के पहचान के बारे में कोई जिक्र नहीं किया जा रहा है और न ही कोई क्लू दिया जा रहा है.

नोट- कानाफूसी कालम की खबरों में सत्यता संभव भी है और नहीं भी. कृपया इसे सिर्फ गासिप मानकर पढ़ें क्योंकि ऐसी खबरों का कोई प्रमाण नहीं मिलता. संभव है खबर में थोड़ी बहुत सच्चाई हो और यह भी संभव है कि खबर बिलकुल गलत हो.


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