तहसील संवाददाताओं को बाहर निकाल दिया हिंदुस्‍तान!

E-mail Print PDF

: नये लोगों की नियुक्तियों पर धंधा, लैपटॉप रखना जरूरी : हिन्‍दुस्‍तान में एक नया हंगामा खड़ा हो गया है। काशी से छपने वाले इस अखबार के सम्‍पादकीय कर्ताधर्ताओं ने अपने संस्‍करण से जुड़े सभी जिलों के तहसील स्‍तर के संवादसूत्रों को उनके पदों से हटा दिया है। इन सभी संवादसूत्रों को महज 605 रूपयों का मासिक भुगतान किया जाता था। इतना ही नहीं, प्रबंधन के फैसलों के अनुसार नयी नियुक्तियों में सभी को अपना लैपटॉप और ब्राडबैंड कनेक्‍शन रखना जरूरी होगा।

प्रबंधन यह बता पाने की हालत में नहीं है कि 605 रूपयों में कौन ऐसा होगा जो लैपटॉप के साथ ब्राडबैंड कनेक्‍शन रख पाने की हैसियत में होगा। जाहिर है कि हिन्‍दुस्‍तान के इस फैसले से दलाली की एक नयी इबारत लिखे जाने का दौर अब बस शुरू ही होने वाला है। हिन्‍दुस्‍तान के आधा सैकड़ा संवादसूत्रों को संस्‍थान की सेवा से हटा दिया गया है। संस्‍करण से जुड़े जिलों में तहसील स्‍तर पर लगभग बंधुआ मजदूर की तरह काम कर रहे यह संवादसूत्र केवल छह सौ पांच रुपये मासिक वेतन पाते थे। अखबार की जड़ें अपने इलाकों में जमाने में महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले वाले इन संवादसूत्रों के भविष्‍य का यह सामूहिक कत्‍लेआम केवल इस तर्क के आधार पर किया गया है कि इन पत्रकारों में पत्रकारीय सोच नहीं है, जबकि संस्‍थान कुछ नया करना चाहता है जिसके लिए यह पत्रकार सक्षम नहीं हैं। जबकि इन संवादसूत्रों ने अपना अस्तित्‍व बचाये रखने के लिए न केवल खबर, बल्कि सर्कुलेशन और विज्ञापन तक का काम कर इस अखबार को ऊंचाइयों तक पहुंचाया। लेकिन आज अचानक पूरी तरह खारिज कर दिये जाने के चलते वे बदहवास हो गये हैं।

उधर खबर है कि इन लोगों के स्‍थान पर जो लोग रखे जा रहे हैं उनसे शर्त रखी गयी है कि वे अपना खुद का लैपटॉप लेंगे। साथ में इंटरनेट से खबरें भेजने के लिए ब्राडबैड का कनेक्‍शन की भी अनिवार्यता रखी गयी है। यह दीगर बात है कि इस शर्त में इसका कोई भी जिक्र नहीं है कि इसका खर्च वे कैसे उठायेंगे। जबकि पुराने संवादसूत्रों को खबरें भेजने में होने वाले खर्च का भी भुगतान नहीं किया जाता था। उन्‍हें केवल फैक्‍स से काम चलाने को कहा गया था। संस्‍थान के इस फैसले के पीछे डाक प्रभारी का काम देख रहे संदीप त्रिपाठी की रणनीति बतायी जा रही हैं। चर्चा है कि नयी नियुक्तियों के लिए धन की भी उगाही जमकर हुई है। नई नियुक्तियों में हुई इन भर्तियों में इस बात का खास ख्‍याल रखा गया है कि वे बड़े धनपति हों या फिर किसी बड़े व्‍यवसाय के मालिक, जो लैपटॉप व ब्राडबैंड का खर्च उठा सकें और अपनी शान बनाये रखने के लिए संस्‍थान से किसी भी तरह की आर्थिक मदद का रोना न रो सकें। ऐसे में आम आदमी से जुड़ी खबरों पर कैसे कलम चलायी जा सकेगी, यह सवाल अंधेरे में है।

संपादकीय विभाग के इस फैसले से यहां के सर्कुलेशन प्रबंधकों ने गहरा असंतोष जताया है। वजह यह कि पुराने संवादसूत्र विज्ञापन के साथ ही प्रसार का काम भी पूरी गंभीरता से देखते थे। जो अब नयी व्‍यवस्‍था के तहत हो पाना लगभग असंभव है। जाहिर है कि भोलेनाथ की नगरी में इस फैसले ने हंगामा खड़ा कर दिया है।


AddThis