क्या मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के पत्रकार लालची हैं?

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अभी तक आपने ग्राहकों को लुभाने के लिए व्यापारियों को तरह- तरह के स्कीम बाजार में लाते हुए देखा एवं सुना होगा लेकिन छत्तीसगढ़ से प्रकाशित होने वाली एक हिन्दी मासिक पत्रिका ने पत्रकारों को अगस्त के महीने में ही लाखों रुपए कमाने के आफर दे डाला है। फरवरी माह से छत्तीसगढ़ के एक छोटे से जिले से प्रकाशित हो रही मासिक पत्रिका 'पंचायत की मुस्कान' के संपादक ने अपने एक अन्य ब्लाग ''मेरी दोस्ती मेरा प्यार''  में पत्रकारों को 15 अगस्त में हजारों लाखों कमाने का आफर दिया है।

यह आफर मेरी दोस्‍ती मेरा प्‍यार पर मौजूद है। पंचायत की मुस्कान के संबंध में एक अन्य ब्लाग में जहां इस पत्रिका के बारे में जानकारी हासिल होती है, पंचायत की मुस्कान में भी यह आफर एक विज्ञापन के रूप में मौजूद है। पंचायत की मुस्कान में पत्रकारों को जो हजारों लाखों रुपए कमाने के आफर दिए गए हैं,  उस में उन्होंने लिखा है कि पत्रकार साथी चाहे तो पंचायत की मुस्कान के अगस्त के अंक के लिए प्रति पेज 6000 रूपए में बुक कराएं और उस पेज पर अपने संबंधों के बल पर जो विज्ञापन उन्हें हासिल होते हैं,  वो विज्ञापन जितनी चाहे उतनी राशि में लगवाएं। यह आफर सिर्फ पत्रकारों को ही दिया गया है।

विज्ञापन दाता अगर पत्रिका से सीधे संपर्क करता है तो उसके लिए विज्ञापन की दर ज्यादा है,  ऐसे में पत्रकार चाहे तो 6000 रुपए के हिसाब से पत्रिका के पेज बुक कराकर उस में 15 से 20  हजार तक के विज्ञापन आसानी से लगवा सकता है। ब्लाग http://panchayatkimuskan.blogspot.com में मौजूद पत्रिका पंचायत की मुस्कान के अनुसार उसमें बहुसंख्यक विज्ञापन मध्य प्रदेश से लगे हैं तथा पत्रिका छत्तीसगढ़ से प्रकाशित होती है। सो जाहिर है कि यह आफर मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के लिए है। पत्रिका वालों का आफर देते समय मानसिकता क्या रही ये तो वही जाने,  लेकिन पत्रकारों के लिए इस आफर को देखकर प्रथम दृष्टया तो आम आदमी का मन यही सोचता है कि क्या मध्यप्रदेश एवं छत्तसगढ़ के पत्रकार लालची हैं,  जो उन्हें पैसे कमाने के लिए इस तरह के लालच दिए जा रहे हैं।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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