पूर्वांचल में दो अखबारों के ब्यूरो प्रभारियों को जान का खतरा!

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इन दिनों पूर्वांचल के दो जिलों के दो अखबारों के दो ब्‍यूरोचीफों को जान का खतरा हो गया है! हालांकि दोनों के ऊपर खतरा होने के कारण अलग-अलग हैं. पहला मामला चंदौली के एक बड़े अखबार के ब्‍यूरोचीफ का है जबकि दूसरा मामला मीरजापुर के दूसरे बड़े अखबार के ब्‍यूरोचीफ का है. चंदौली वाले ब्‍यूरोचीफ ने एसपी को पत्र भी लिखा है जिसके बाद उन्‍हें एक गनर मुहैया कराया गया है जबकि मीरजापुर वाले ब्‍यूरोचीफ खुद इधर-उधर बचते फिर रहे हैं.

सूत्रों का कहना है कि चंदौली वाले अखबार के प्रभारी की जान को उनके पुराने सहयोगी से ही खतरा हो गया है. ब्‍यूरोचीफ ने चंदौली के एसपी को एक आवेदन देकर कहा है कि उनकी हत्‍या की सुपारी दी गई है. बताया जा रहा है कि उन्‍होंने किसी का नाम अपने आवेदन में नहीं लिखा है, परन्‍तु मौखिक रूप से अपने एक पुराने सहयोगी का नाम पुलिस अधीक्षक को बताया है. एसपी ने ब्‍यूरो चीफ को एक पुलिस गनर मुहैया करा दिया है. हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि सारा खेल अखबार के वरिष्‍ठों के इशारे पर हुआ है ताकि अखबार से निकाले गए पुराने पत्रकार को सबक सिखाया जा सके और गनर लेकर रौब-रुतबा भी कायम किया जा सके.

दूसरी खबर मीरजापुर के ब्‍यूरोचीफ की है. एक दबंग विधान परिषद सदस्‍य के लोग इन्‍हें खोज रहे हैं तथा लगातार कार्यालय का चक्‍कर लगा रहे हैं. ब्‍यूरोचीफ परेशान हैं, उनकी इस मामले में सीधी संलिप्‍तता नहीं है परन्‍तु वो भागे-भागे फिर रहे हैं. इसकी खबर संस्‍थान के बड़े आफिस के कर्ताधर्ताओं को भी है, परन्‍तु वो स्थिति स्‍पष्‍ट नहीं कर पा रहे हैं. बताया जा रहा है कि पूरा मामला विज्ञापन से जुड़ा हुआ है. विधान परिषद सदस्‍य से ज्‍यादा पैसा लेकर इस अखबार ने कम पैसे में विज्ञापन छापा था.  अब उसी पैसे की वापसी के लिए विप सदस्‍य के लोग ब्‍यूरोचीफ तथा विज्ञापन प्रभारी को खोज रहे हैं. दोनों लोग लगातार इन लोगों से बचते चल रहे हैं.

अंदरखाने की जो खबर है वह यह है कि 13 मई को सरकार के चार साल पूरे होने विधान परिषद सदस्‍य ने हिंदुस्‍तान को 67 हजार का विज्ञापन दिया था. इसमें तय हुआ था कि यह विज्ञापन अखबार के मीरजापुर तथा लखनऊ एडिशन में छापा जाएगा. परन्‍तु हेड आफिस का एक बंदा केवल मीरजापुर में ही विज्ञापन छपवा पाया, लखनऊ एडिशन में यह विज्ञापन नहीं छपा. मीरजापुर में जो विज्ञापन छपा उसकी कीमत केवल 27 हजार थी,  लखनऊ एडिशन में यह विज्ञापन नहीं छपा. जिसके चलते विधान परिसद सदस्‍य का चालीस हजार रुपये हिंदुस्‍तान के पास ही रह गया.

खबर है कि इसी चालीस हजार रुपये की वापसी और लखनऊ एडिशन में विज्ञापन न छपने को लेकर विधान परिषद सदस्‍य के लोग ब्‍यूरो प्रभारी और विज्ञापन प्रभारी को खोज रहे हैं. बताया जा रहा है कि इसमें ब्‍यूरो चीफ की कोई गलती नहीं है, यह गलती हेड आफिस से ही हुई है. पैसे में भी कोई गोलमाल नहीं हुआ है बल्कि सारे पैसे कंपनी के खाते में ही जमा हैं, परन्‍तु विधायक के लोग पैसा वापस चाह रहे हैं, वो इन लोगों की तकनीकी दिक्‍कत समझने को तैयार नहीं हैं. अब ब्‍यूरोचीफ और अन्‍य लोग परेशान हैं. सूत्रों का कहना है कि ब्‍यूरोचीफ ने इस स्थिति से अपने डाक प्रभारी और संपादक को भी अवगत करा दिया है. अब वो ही लोग कोई रास्‍ता निकालेंगे.


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