दैनिक जागरण, बस्ती के जिला प्रभारी आशुतोष पर कई और हैं आरोप

E-mail Print PDF

भड़ास पर दैनिक जागरण, बस्ती के जिला प्रभारी आशुतोष मिश्र की कहानी देखी तो इनके बारे में और कुछ बताने का मन कर गया. अनुरोध है, मेरी गोपनीयता बनाये रखियेगा. आशुतोष जब देवरिया में जिला प्रभारी थे तब इन्होंने तत्कालीन नगर पालिका के अध्यक्ष रामायण राव के खिलाफ साजिशें की थी. मामला इतना बिगड़ गया कि निदेशक सुनील गुप्ता को देवरिया आना पड़ा और आशुतोष को हटाना पड़ा. जागरण की बहुत भद पिटी थी.

कुछ दिन गोरखपुर ऑफिस में रहने के बाद इन्हें महाराजगंज जिले का प्रभारी बनाया गया. यहां भी आशुतोष ने ऐसी ऐसी करतूतें की कि जागरण के आला अफसरों को शर्मसार होना पड़ा. इन्होंने अपने कुछ साथियों को, जो इनकी साजिशों में शामिल नहीं होते थे, जागरण से बाहर करवाने में कोई कसर बाकी नहीं रखा. बस्ती जाने के बाद भी ये अपनी आदत से बाज नहीं आये और इन्होंने बस्ती से महाराजगंज प्रभारी बना कर भेजे गए ज्ञानेंद्र त्रिपाठी को साजिश करके नेपाल के पोखरा में अय्याशी के मामले में फंसा दिया.

अगर बस्ती में इनका नाम किसी हत्यारे से जोड़ा जा रहा है तो निश्चित रूप से ये आरोप सही होगा क्योंकि मुझे पता चला है कि कॉल डिटेल की जांच शुरू होते ही आशुतोष 5 अगस्त की रात में आइडिया मोबाइल के डीलर हिमांशु सिंह के पास गए थे. अगर ये सही है तो ये देर रात उनसे मिलने क्यों गए. आप पता लगा लीजिये, इस पर आरोप लगने के बाद इस्टर्न यूपी के हेड संत शरण अवस्थी दो दिन बस्ती में रहे. उन्होंने तमाम लोगों से मुलाकात की और दफ्तर में मीटिंग में कोई जागरण कर्मी ऐसा नहीं रहा जिसने आशुतोष की करतूतों पर रोशनी न डाली हो. कल ही वीडी ओझा का ब्रह्मभोज था और उसकी कवरेज में फोटोग्राफर की हिम्मत नहीं हुई जाने की.

दैनिक जागरण के एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. अगर उपर उल्लखित तथ्यों में कोई कमी-बेसी दिखे तो उसका खंडन-मंडन नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए कर सकते हैं.


AddThis