संपादक की केबिन में क्यों बेहोश हो गई एंकर?

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कल सुबह यानी बुधवार 10 अगस्त की सुबह एक मीडिया हाउस के यूपी चैनल में संपादक की केबिन में चैनल की एंकर पहुंची. माननीय संपादक महोदय पहले से ही अपने केबिन में विराजमान थे. गुस्से में तमतमाती हुई एंकर ना जाने किस बात को लेकर संपादक के पास गई थी. करीब 15-20 मिनट केबिन के भीतर दोनों के बीच मीटिंग चली. लेकिन इसी बीच कुछ ऐसा हो गया जिसने डेस्क पर मौजूद हर पत्रकार को हैरान कर दिया.

संपादक की केबिन में ही एंकर बेहोश होकर ज़मीन पर गिर गई और इसके बाद तो मानो जैसे संपादक के हाथपांव फूल गये हों. तुरंत वे केबिन से बाहर निकले और लोगों से पानी लाने को कहा. डेस्क पर मौजूद कुछ लोग पानी लेकर आये और करीब पांच मिनट तक एंकर के चेहरे पर पानी के छींटे मारे गये. इसके बाद एंकर को होश आया. होश में आते ही एंकर वहां से उठकर चली गईं.

अब प्रश्न तो बार बार एक ही खड़ा हो रहा है कि आखिर केबिन के भीतर ऐसा क्या हुआ जिसके चलते एक एंकर बेहोश हो गई. क्या संपादक ने एंकर को कुछ भला बुरा कह दिया. अब हकीकत तो भगवान जानें या फिर संपादक जाने या फिर एंकर जाने, क्योंकि केबिन बंद था और किसी ने अंदर हुई गुफ्तगू को नहीं सुना. लेकिन एक बात ज़रूर यहां बता दें कि ये एंकर वही है जो संपादक के साथ गाज़ियाबाद कांड में फंसी थी. और यह एंकर भी वही है जो संपादक की बेहद करीबी है और जिसके सौ खून भी संपादक माफ कर देते हैं.

एक बार तो सुबह का बुलेटिन भी एंकर ने घर पर नींद के आगोश में होने के चलते छोड़ दिया था. लेकिन सज़ा के नाम पर एंकर को एक कप चाय मिली थी, वो भी संपादक की कंपनी में उनके केबिन के भीतर. लेकिन इसी गुनाह यानी एक दिन का बुलेटिन छोड़ देने के चलते एक दूसरी एंकर को कई दिनों के लिए ऑफ़ एयर कर दिया गया था. अब ये तो संपादक की लीलाएं हैं जो ना जाने प्रबंधन को क्यों नहीं दिखती? वैसे बेहाशी कांड के बाद इस चैनल में चर्चाओं का बाज़ार गर्म हैं.

एक पत्रकार द्वारा भेजी गई चिट्ठी पर आधारित. घटनाक्रम की पुष्टि न होने के कारण संपादक, एंकर और मीडिया हाउस के नाम को हटा दिया गया है.


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