उगाही को प्रमोट करता है चैनल प्रबंधन, कई कर्मियों को पुलिस ने पकड़ा

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एक न्यूज चैनल है. कुछ साल पहले लांच हुआ. कई तरह के आरोप इस चैनल पर लगते रहे हैं. ब्लैकमनी और हवाला के भी आरोप चैनल पर लगे. इसी चैनल के बारे में पता चला है कि यहां ब्लैकमेलिंग को बिजनेस माडल बना लिया गया है. रिपोर्टरों को इस काम में लगा दिया गया है कि वे पैसे लाएं और अपनी तनख्वाह ले जाएं.  लेकिन अचानक ऐसा हुआ कि कुछ ही दिनों में कई लोग चैनल छोड़ चुके हैं.

पहले ही स्टाफ की कमी से जूझते चैनल में पूरे दिन मानों कुत्ते ही रोते रहते हैं. न्यूज रूम हर समय खाली रहता है. लोगों के नौकरी छोड़ने की वजह फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट स्टिंग को माना जा रहा है. दरअसल इसी स्टिंग की आड़ में चैनल के मालिकान द्वारा दिल्ली और एनसीआर के कई डाक्टरों को ब्लैकमेल करने की हिदायत जारी करने की बात कही जा रही है. सूत्रों के मुताबिक कई महीने से चल रहे इस खेल में मालिकान के ही इशारे पर नोएडा और दिल्ली के कई डाक्टरों को स्टिंग दिखाने की धमकी देकर मोटी रकम ऐठी जा चुकी थी. लेकिन इसी दौरान पूर्वी दिल्ली के एक डाक्टर की शिकायत के बाद सीमापुरी पुलिस ने इस चैनल की पूरी टीम को ओबी कैमरा और कार के साथ धर दबोचा.

थाने में एक महिला रिपोर्टर समेत कैमरामैन और कई वरिष्ठों को पुलिस ने बैठा लिया. पुलिस ने कई वरिष्ठों के आई कार्ड जब्त करके उनसे सघन पूछताछ की. पुलिस ने रिपोर्टर के कब्जे से कई डाक्टरों की लिस्ट बरामद की जिनसे आगे भी उगाही की जानी थी. सीमापुरी थाने के एडिशनल एसएचओ ने जब चैनल के खिलाफ जबरन उगाही और धमकी देने जैसे आरोपों के तहत मामला दर्ज करने की बात की तो चैनल में हड़कंप मच गया. आनन फानन में अपने राजनीतिक आकाओं से मदद मांगी गई और कई वरिष्ठों को थाने मामले को मैनेज करने के लिए भेजा गया. सबसे हैरान करने की बात है कि कई घंटे तक एक महिला रिपोर्टर और कैमरामैन समेत चैनल के वरिष्ठ अधिकारियों को सीमापुरी पुलिस ने अपराधियों की तरह कब्जे में रखा और चैनल के मालिकान कुछ ना कर सके.

दरअसल चैनल में पत्रकारों के नाम पर जमा की गई टीम में एकाध को छोड़कर कोई भी मजबूत नाम नजर नहीं आता. उगाही और ब्यूरो बेचने से लेकर स्ट्रिंगरों से वसूली करवाने के लिए बदनाम हो चुके इस चैनल के खिलाफ पुलिस भी सबूत जुटा रही है. यही वजह है कि सम्मानित पत्रकार इस चैनल की तरफ अब रुख करते हुए डर रहे हैं. चैनल की छवि को लेकर सभी डरे हुए हैं. साथ ही एक के बाद एक कई लोगों का एकदम चैनल छोड़ना भी चर्चाओं में बना हुआ है. रोजाना पत्रकारों और कर्मचारियों पर फंडिंग को लेकर दबाव बनाया जा रहा है. खुलेआम कहा जाता है तनख्वाह लेनी है तो कमाई करो. कई लोग सिर्फ अपनी उगाही कराने की काबिलियत के दम पर ही चैनल में टिके हुए हैं. इनमें से कुछ नाम तो ऐसे हैं जो भले ही मीडिया में कहीं सुने ना गये हो लेकिन उनके केबिन काफी आलीशान हैं. यही वो नाम है जो पिछले दिनों मालिकान के खिलाफ नोएडा के सैक्टर 20 थाने में दर्ज रिपोर्ट को ले देकर निबटवाने का हुनर जानते हैं.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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