आरोपों से घिरने के बावजूद पत्रकारिता के इस अध्‍यापक को शिक्षक श्री सम्‍मान

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महामना मदन मोहन मालवीय पत्रकारिता संस्थान, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के प्रोफेसर राम मोहन पाठक को उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षक दिवस के दिन शिक्षक श्री सम्मान से सम्मानित करने जा रहा हैं. शिक्षक श्री सम्मान पाने वालों को 50 हजार रुपये की धनराशि प्रदान की जाएगी. यह पुरस्‍कार पाने वाले प्रो.पाठक पर जालसाजी करके मंदिर व उसकी प्रापर्टी खरीदने, मंदिर से राधाकृष्ण की मूर्ति चोरी कर गायब करने, जालसाजी करने, जान से मारने की धमकी देने का आरोप भी है.

शिक्षक श्री सम्‍मान पाने वाले राम मोहन पाठक के खिलाफ दिनांक 23-06-2010 को मु.अ.सं.167/10 के अंतर्गत धारा 379/419/ 506 के पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है. यह मुकदमा  बेसर देवी, पत्नी स्व. लालजी मिश्र, कबीर चौरा, वाराणसी ने दर्ज कराया है. कई माह से पुलिस वाले केस दर्ज नहीं कर रहे थे तो बेसर देवी न्यायालय की शरण में गईं. न्यायालय के आदेश के बाद चेतगंज पुलिस ने को यह रिपोर्ट दर्ज करनी पड़ी थी.

इतना ही नहीं प्रोफ़ेसर राममोहन पाठक ने अपने शोध प्रबंध में किस तरह वेद प्रताप वैदिक की बहुचर्चित किताब के मौलिक विश्लेषण को और पं. अंबिका प्रसाद वाजपेयी की किताब के अंशों को एक-दो शब्द बदल कर अपना बना कर पेश किया, इसे सीएनईबी के चोर गुरु कार्यक्रम में दिखाया जा चुका हैं. काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्रो. पाठक ने ली हैं. इस मामले में विश्वविद्यालय एक कमिटी बना कर इसकी जांच कर रहा हैं.

विद्यापीठ का पुस्तक खरीद घोटाला किसी से छिपा नहीं हैं. इस तरह के तमाम आरोप होने के बाद भी प्रो. पाठक को पुरस्कार मिलना पुरस्कारों पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करता हैं. गौरतलब है कि बेसिक शिक्षा विभाग ने राज्य पुरस्कार के लिए एक ऐसे व्यक्ति का चयन किया था जो दागी था इस मामले के संज्ञान में आने पर पीलीभीत के बेसिक शिक्षा अधिकारी निलंबित हो गए और दागी को पुरस्कार की लिस्ट से हटा दिय गया था. वैसे ही सरकार को भी इस मामले से फिलहाल कोई लेना देना नहीं है, वह तो जब मामला सामने आएगा तब देखा जाएगा कि नीति के अनुसार काम कर रही है.

जागरण

गांडीव

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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