हिंदुस्‍तान के तहसील प्रतिनिधियों को प्रबंधन का फरमान, लैपटॉप खरीदो या नौकरी छोड़ो

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हिंदुस्‍तान ने बिहार में तहसील स्‍तर के पत्रकारों के लिए नया फरमान जारी किया है. अब तक फोन-फैक्‍स के सहारे अपनी खबरों को ब्‍यूरो कार्यालय भेजने वाले पत्रकारों को स्‍पष्‍ट कह दिया गया है कि अब वे लैपटॉप और इंटरनेट की व्‍यवस्‍था करें अथवा कहीं और नौकरी की तलाश कर लें. प्रबंधन के इस फरमान के बाद से ही तहसील स्‍तर के पत्रकार परेशान हैं. उनके लिए एक तरफ कुंआ है तो दूसरी तरफ खाई बन गई है.

सूत्रों का कहना है कि यह निणर्य उच्‍च स्‍तर पर लिया गया है. प्रबंधन इससे तहसील एवं प्रखंड के नाम पर कई जगहों पर खुले कार्यालयों को बंद करके अपना खर्च कम करना चाहता है, पर इसके लिए बकरा तहसील स्‍तर के स्‍थानीय प्रतिनिधियों को बनाया जा रहा है. इन प्रतिनिधियों को लैपटॉप खरीदने को मजबूर किया जा रहा है, जो प्रतिनिधि पैसे के बारे में कह रहे हैं उन्‍हें साफ कह दिया जा रहा है कि फिर आप अपनी व्‍यवस्‍था कहीं और कर लीजिए. प्रतिनिधि परेशान हैं.

प्रबंधन के इस निर्णय से तहसील यानी अनुमंडल स्‍तर के पत्रकार परेशान हैं, क्‍योंकि अखबार उन्‍हें इतना पैसा नहीं देता है कि वो लैपटॉप खरीदने लायक बचत कर सकें. ज्‍यादातर विज्ञापन से मिलने वाले कमीशनों पर निर्भर रहते हैं. निकाले जाने से परेशान हिंदुस्‍तान के पत्रकार अब कर्ज-उधार लेकर अपने लिए लैपटॉप खरीद रहे हैं. जो खरीद पाने में सक्षम नहीं हैं अब वे भरे मन से दूसरे अखबारों में जुगाड़ लगाने लगे हैं. कुछेक प्रतिनिधियों का कहना है कि अवसरों की मारामारी देखते हुए वो कैसे भी लैपटॉप खरीदने को मजबूर हैं. उन्‍हें संस्‍थान की तरफ से कोई सहायता भी नहीं दी जा रही है.


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