इन्दौर के एक पत्रकार के करोड़पति होने की गंदी कहानी

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इन्दौर के एक पत्रकार के करोड़पति होने की कहानी को मैं गंदी कहानी इसलिए कह रहा हूं कि इस पत्रकार ने करोड़पति होने के लिए जो रास्ता चुना वह तो नगरवधुओं और चंबल के डाकुओं से भी गया गुजरा था। मुफलिसी में पले और बढ़े इस पत्रकार ने, जो कि पहले नईदुनिया फिर चौथासंसार में काम करके थोड़ा बहुत नाम कमा चुका था, अपने ही पत्रकार साथियों को संवादनगर एक्सटेंशन में प्लाट देने का सपना दिखाकर उन्हें 1993 में सदस्य बनाना आरंभ किया।

बेचारे मकान के सपनों के मारे पत्रकारों ने इसके पास अपने खून-पसीने की कमाई के लाखों रुपए जमा करा दिए। देखते ही देखते यह पत्रकार कार में चलने लगा इस बीच सभी पत्रकारों को यह कहता रहा कि संवादनगर में अब ये काम हो गया है और पैसे दे दो, पत्रकार पैसे देते गए। फंस जो गए थे। इस बीच एक हादसा हुआ इस पत्रकार की जवान बीबी को कैंसर हो गया, कहने वालों की जबान पर कोई क्या रोक लगाए? लोगों ने कहा कि ये गरीब पत्रकारों की बद्दुआ है। बहरहाल पत्रकार की बीबी भली महिला थीं, जल्दी ही इस निर्मम दुनिया से चली भी गईं।

खैर, इस पत्रकार ने दूसरा विवाह कर लिया और इस बीच संवादनगर के सारे प्लाट गैर पत्रकारों को सदस्य बनाकर बेच दिए और खुद भी संवादनगर नवलखा का मकान बेचकर गायब हो गया। अब किस्मत के मारे, अपने ही साथी के हाथों लुटे-पिटे और बर्बाद हुए पत्रकार इस नटवरलाल को खोज रहे हैं। और ये धोखेबाज पत्रकार सभी अखबारों से गेटआउट होने के बाद अब छुपता फिर रहा है। सोचिए इस पत्रकार के करोड़पति होने की गंदी कहानी पर....संवादनगर के इस घोटालेबाज पत्रकार को धिक्कार भेजें।

इंदौर से अर्जुन राठौर की रिपोर्ट.


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