मुख्‍यमंत्री के सचिव ने हड़काया तो 'हुआंहुआं चैनल' का भौकाल प्रमुख करने लगा भुपभुप

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: सचिव ने कहा- बदतमीज कहीं के, लतिया कर बाहर कर दूंगा : इसके पहले यूपी भवन में भी औकात दिखायी जा चुकी है कथित भौकाली को : नई दिल्‍ली : चैनल मार्केट के कबाड़ी बाजार में एक चैनल है, जो अब 'था' होने जा रहा है। नाम है, मान लीजिए ''हुआंहुआं'' चैनल। यह चैनल अभी कुछ ही दिन पहले तक कई राज्‍यों में अपने जोबन-नचाऊ अंदाज में खूब दिखता था।

इस सफलता के चलते इसके मालिक को लगा कि यह उसके दिमाग की जीत है, न कि कर्मचारियों की हाड़तोड़ मेहनत का नतीजा। बस फिर क्‍या था, दंदफंद में माहिर सत्‍संगप्रेमी मालिक ने कर्मचारियों को औकात में लाना शुरू कर दिया। वो चाहता था कि पत्रकारों को पतुरिया की तरह व्‍यवहार करना सिखाया जाए। लेकिन पत्रकार टाइप यह लोग भड़ुआ तक बनने को तो तैयार थे, लेकिन पतुरिया बनने को राजी नहीं हुए। नतीजा, इस नवधनाढ्य बनिया ने एक-एक करके सबकी रोजी-रोटी पर लात मार कर ठिकाने लगाया और अपनी ही तरह के, धंधाबाजी में, उस्‍ताद लोगों को गोद में बिठाने के लिए भारी रकम पर ले आया। उसे लगा कि उसके बेटे-पोतेनुमा यह बच्‍चे उसका नाम रौशन करेंगे। लेकिन अब पता चल रहा है कि घर को ही आग लग गयी घर के चिराग से।

अपने नये मालिक के लिए यह नये भड़ुए बाकायदा पतुरियापने पर उतारू हो गये। मालिक को और क्‍या चाहिए था, वह अपने निजी सत्‍संग में जुट गया। हालांकि उसकी हालत आजकल काफी पतली चल रही है। शुरू में तो देश की हर भाषा और बोली में इस चैनल को लांच करने के अपने गुब्‍बारेनुमा दावों में हवा खूब भरी गयी, लेकिन अब उस हवा को सीटी मारने के अंदाज में छोड़ा जा रहा है। ऐसी हालत में जाहिर है माहौल बदबूदार हो चला है।

तो ताजा खबर यह है कि इन पतुरियों की करतूतों से अब इनके पितामहनुमा रहनुमा का दिल फट गया है। कारण है इन पतुरियों का बड़बोलापन और केवल दिखावे के स्‍तर का अक्‍खड़वाद। चाटुकारिता के चलते इन नव-पतुरियावादियों ने अपने स्‍वामी को बताया कि वे ये कर सकते हैं, वो कर सकते हैं। हेन कर सकते हैं, तेन कर सकते हैं। इस नेता की टेंट ढीली कर सकते हैं, उस कुबेर का खजाना खुलवा सकते हैं। लेकिन वे दरअसल क्‍या कर सकते हैं, इसकी तो थाह ही नहीं लग पा रही थी। जबकि मालिक की निगाह में इनका कद बढ़ता जा रहा था।

यह सब जानते हैं कि विज्ञापन वाले यानी सेल्‍स डिपार्टमेंट के लोग काफी बड़े खिलाड़ी और पूरे वाले घाघ होते हैं। उन्‍होंने मामला ताड़ लिया और इस दो सदस्‍यीय पतुरिया गिरोह के सिजरा के अध्‍ययन में जुट गये। पता चला कि इनमें से एक पतुरिया, जो झूठ बोलने और भौकाल पेलने में माहिर है, खुद को यूपी के मुख्‍यमंत्री के एक ताकतवर सचिव का बहुत करीबी बताते हुए अपनी दुकान चलाता फिरता है। बस, फिर क्‍या था। सेल्‍स वालों ने इसे बेचने का तरीका खोज लिया। दरअसल, इस समेत कई चैनलों के उत्तर प्रदेश में प्रसारण न होने के चलते वहां के विज्ञापन नहीं मिल रहे थे। बढिया मौका ताड़कर सेल्‍सवालों ने मालिक के पास अर्जी लगायी कि चूंकि फलां राज्‍य से विज्ञापन नहीं मिल रहे हैं, इसलिए इस पतुरिया के वहां ऊंचे सम्‍पर्कों का सहयोग ले लिया जाए। मालिक ने सेल्‍स के इस प्रस्‍ताव पर हामी भर दी।

हुक्‍म जारी हो गया तो गिरोह को जैसे जुलाब का असर हो गया। घेराबंदी बढ़ते देख मजबूर होकर इस छोटे प‍तुरिया ने एक दिन उस राज्‍य के स्‍टेट गेस्‍ट हाउस में सेल्‍स के लोगों को उस सचिव से मिलाने के लिए बुला लिया। सेल्‍स के लोग पहुंचे तो उन्‍हें भीतर ही नहीं घुसने दिया गया। सुरक्षाकर्मियों ने पतुरिया को बाहर ही खड़ा किये रखा था। तीन घंटे की प्रतीक्षा के बाद सचिव निकले तो, लेकिन पतुरिया के सलाम का जवाब केवल हाथ हिला कर ही दिया और कार में बैठ कर फुर्र हो गये। पतुरिया का चेहरा फक्‍क हो गया और लगा पुकपुक भुपभुप टाइप से हिलने-डुलने। बेचारे भौकाल प्रमुख उर्फ झुट्ठाधिराज का सेल्‍सवालों के सामने किरकिरी जो हो गयी, सो अलग।

खबर है कि इसके कुछ दिन बाद इस पतुरिया का आमना-सामना उस सचिव से हुआ, तो अपने चिंटुओं पर रूतबा झाड़ने के लिए उसने सचिव से अपनापा दिखाते हुए बात की। बताते हैं कि इस अंदाज पर सचिव का मूड खराब हो गया और उसने इस बदतमीजी पर कसकर झाड़ लगाते हुए यहां तक धमका दिया कि अभी लतिया-धकिया कर बाहर निकलवा दूंगा, सारी अकड़ निकल जाएगी। यह बात आम होते ही इन पतुरियाओं की नौकरी पर खतरे के बाद मंडराने लगे हैं। सुनते हैं कि इन सभी ने अपना बोरिया-बिस्‍तरा पैक कर लिया है। न जाने कब खर्रा पकड़ा दिया जाए कि निकलो बाहर, अब तुम्‍हारी जरूरत नहीं रही। हालांकि कहने वाले कहते हैं कि चैनल मालिक पहले इन लोगों के हाथों सारे पाप कुकर्म करा लेगा फिर आखिर में इन लोगों के पिछवाड़े लात मारेगा, जैसा कि चलन है।

कानाफूसी कैटगरी की खबरें सुनी-सुनाई बातों पर आधारित होती हैं जिनमें सच्चाई संभव है और नहीं भी. जो व्यक्ति इसमें सौ फीसदी सच्चाई तलाशेगा वो अपनी मूर्खता के लिए खुद जिम्मेदार होगा. वैसे 'स्टे फुलिस' में कोई खास दिक्कत नहीं है क्योंकि स्टीव जाब्स कह गए हैं... आप अपनी मूर्खता या विद्वता का प्रदर्शन नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए कर सकते हैं.


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