लंबी छुट्टी से लौटकर आफिस आ सकेंगे बर्नी साहब?

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: क्या कभी लौट पाएंगे अजीज बर्नी के अच्छे दिन : सहारा मीडिया में एक बड़ी तेज चर्चा है. वो ये कि अजीज बर्नी के दिन गए. अब उनके नीके दिन, अच्छे दिन न लौटेंगे. सहारा मीडिया के उर्दू अखबारों-मैग्जीनों के ग्रुप एडिटर के रूप में कार्यरत अजीज बर्नी के बुरे दिन उपेंद्र राय के न्यूज डायरेक्टर बनने के बाद शुरू हुए. ताजी सूचना है कि उन्हें लंबी छुट्टी पर जाने को कह दिया गया है.

कुछ लोगों का कहना है कि एक तरह से उन्हें सस्पेंड किया गया है पर उनकी सेवाओं व वरिष्ठता का ध्यान रखते हुए बर्नी साहब को चुपचाप छुट्टी बढ़ा लेने को कहा गया है. माना जा रहा है कि सहारा प्रबंधन अजीज बर्नी के साथ लंबे जुड़ाव को टाटा बाय बाय बोलने वाला है. हालांकि सहारा में परंपरा है कि यहां जुड़ने वालों को जल्दी टाटा बाय बाय नहीं किया जाता. जिनसे छुटकारा पाना होता है, उन्हें साइडलाइन कर दिया जाता है. सहारा मीडिया में दिग्गज पदों पर कार्यरत रहे कई लोग इन दिनों सहारा में बनवास काट रहे हैं. इनकी लिस्ट में अब अजीज बर्नी का भी नाम शामिल हो गया है. कानाफूसी पर यकीन करें तो अजीज बर्नी का काम उनके अधीन रहे शकील हसन शम्सी और असद रजा को सौंप दिया गया है. ये दोनों पहले भी बर्नी के अंडर में कार्यरत थे लेकिन बर्नी के छुट्टी पर भेजे जाने के बाद इन दोनों का दायित्व बढ़ा दिया गया है.

अजीज बर्नी को सहारा में साइडलाइन करने की हिम्मत बड़े-बड़ों को नहीं हो पाती थी लेकिन ये बड़ा काम बेहद साधारण तरीके से उपेंद्र राय न कर दिखाया. जो लोग उपेंद्र राय को कमतर आंकते थे, वे भी अब मानने लगे हैं कि इस युवा ने कम समय में ही बेहद शांत तरीके से बहुतों के कान काट डाले हैं. कुछ का कहना है कि उपेंद्र राय ने कुछ नहीं किया, सब अपने करमों को फल पा रहे हैं. उपेंद्र ने तो बस सबको आइना दिखाने का काम शुरू किया है. बर्नी साहब को नजदीक से जानने वाले कहते हैं वे फीनिक्स पंछी की तरह हैं, जो लोग उनके अंत की भविष्यवाणी करते हैं, उन्हें बार-बार झूठा साबित होना पड़ता है क्योंकि बर्नी साहब अचानक सीन में गेस्ट अपीयरेंस की तरह प्रकट होते हैं और देखते ही देखते मुख्य कैरेक्टर को अपना लेते हैं. संभव है ये चमत्कार इस बार भी हो लेकिन बर्नी विरोधियों का कहना है कि काठ की हांड़ी आग पर बार-बार नहीं चढ़ती.


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