जी साब, ये अखबार का दुश्मन है

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वो यूपी के एक जिले के बड़े अखबार का जिला प्रभारी है. एक फरवरी को उसकी मंडल मुख्यालय स्थित प्रिंटिंग सेंटर आफिस पर मीटिंग हुयी. जीएम साब की आखिरी लड़की की शादी के लिए हर प्रभारी से 25 हजार मांगा गया. सबसे पहले उसने दिया. अपनी गाड़ी से जीएम को भेजा, बाद में खुद भी जयपुर गया. संपादक उसके खिलाफ एक शब्द नहीं सुन सकते. मध्य प्रदेश में दतिया है, जहां पीताम्बरा पीठ है. वहां इसने बगलामुखी की सिद्ध साधना करा रखी है. उसे ज्योतिषियों ने बता रखा है कि कोई उसका बाल भी बांका नहीं कर सकता.

इसीलिए वो मुबारक का बाप बन गया. सपा वाले उसके खाने-पीने के ठेकेदार हैं. और बाकी तमाम कर्जदार. जयपुर गया तो एक विधायक ने दस हजार दिया. एक व्यापारी नेता से नोकिया का महंगा मोबाइल सेट वसूल लिया. टीवी वाले से उधार लिया और पैसा अब तक नहीं दिया. चड्ढी बनियान तक के लिए भी इसके पास प्रायोजक हैं. एक पुलिस इंस्पेक्टर ने उसे लकड़ी का तख्त दिया. समय समय पर और भी बहुत कुछ देता रहता है. मजाल है किसी की कि उस इंस्पेक्टर के खिलाफ लिख पाए. ऐसे बहुत से पालतू हैं जो कुछ न कुछ करते रहते हैं और अखबार का इस्तमाल उनके लिए होता रहता है. जो ये चाहता है, अखबार में छपता वही है.

नोयडा वाले बनाते रहे नियम. सबकी मां बहन करना इसके बाएं हाथ का खेल है. पिछले दिनों भड़ास पर उसकी कुछ करतूतें आयीं थीं. उसने जुगाड़ लगाकर यशवंत जी से भी पता लगाना चाहा कि किसने लिखा. उसका एक रिपोर्टर उसके साथ ही झोला लेकर आया है. जब भी वो अपने जिले के लिए जाता है, पूरा दफ्तर जान जाता है कि रखैल आ गयी. सुना है कि उस रिपोर्टर की वो चाची है. बताइए साब ये कैसे संभव है कि चाची अपने भतीजे के सामने रंग रेलियां मनाए. इसीलिए उसे घर भेज दिया जाता है. साब जी वो संपादक और जीएम की नजर में इतना काबिल है कि मीटिंग में उसके काम करने के तरीके की मिसाल दी जाती है. भगवान भला करे उसके साथ काम करने वालो का. ये खबर बाजार में आते ही वो बहुतों के उंगली करेगा और बड़े अफसर सब कुछ जानकर भी खामोश रहेंगे. महाभारत में भी शायद ऐसा ही कुछ हुआ था.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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