हिंदुस्‍तान के भदोही, सोनभद्र, मिर्जापुर ऑफिस पर भी लगेगा ताला!

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पांच हजार से कम सर्कुलेशन वाले हिंदुस्तान के मोडम कार्यालयों के बंद होने के क्रम में हिंदुस्तान, आसनसोल कार्यालय पर कल से ताला लगने की खबर वाराणसी में जैसे ही पहुंची हिंदुस्तान के पत्रकारों में हड़कंप मच गया। वाराणसी एडिशन से जुड़े सोनभद्र, मिर्जापुर और भदोही कार्यालयों पर बंदी की तलवार लटक गयी है, क्योंकि इन तीनों ही कार्यालयों से जुड़े प्रसार क्षेत्रों में सर्कुलेशन पांच हजार से कम है। इस घटना के बाद वाराणसी से निकलने वाले बाकी बड़े अखबारों जागरण, अमर उजाला, आज और राष्ट्रीय सहारा ने अपनी रणनीति तैयार करनी शुरु कर दी है, ताकि इन जिलों में हिंदुस्तान के सर्कुलेशन को पकड़ा जा सके।

मंगलवार को हिंदुस्तान के इन तीनों ही कार्यालयों से जुड़े पत्रकारों के हलक सूखे हुए थे और वे किंतु परंतु की हालत में थे।  भरोसे के सूत्रों का दावा है कि प्रसार विभाग इन कार्यालयों को बंद न होने देने के लिए जी तोड़ प्रयास जारी रखे हुए हैं और ऐसी कोई बात फिलहाल वाराणसी कार्यालय में नहीं चल रही है, फिर भी पत्रकारों का दिल है कि मान ही नहीं रहा है। भदोही, मिर्जापुर और सोनभद्र के कार्यालयों से जुड़े लगभग तीन दर्जन कर्मचारियों के परिवारवालों के चेहरों पर भी हवाईयां उड़ने लगी हैं। इलाहाबाद से स्थानांतरित होकर आए संपादक अनिल भास्कर के सामने यही पहली चुनौती है कि वे इन जिलों सहित अन्यान्य स्थानों के पत्रकारों के मन में भरोसा कैसे पैदा करें? अगर वे विनम्रतापूर्वक काम करेंगे तो शायद चल जाएगा और अगर शशि शेखर के तेवर में काम करेंगे तो इलाहाबाद, लखनऊ और बरेली की तरह हमेशा विवादों में ही घिरे रहेंगे।

हिंदुस्तान के पत्रकारों की चिंता गैरवाजिब भी नहीं है। इसकी वजह है कि हिन्दुस्तान अपना बंगाल आपरेशन पूरी तरह से बंद करने की तैयारी कर चुका है। आसनसोल से बर्दमान, बांकुड़ा, वीरभूम और पुरूलिया जिला भी जुड़े हुए थे। यहां अखबार का सर्कुलेशन पांच हजार से ऊपर था। फिर भी अखबार बंद कर दिया गया। खबर यह भी है कि इसके साथ ही रानीगंज और दुर्गापुर कार्यालयों पर भी ताला लगा दिया जाएगा। यानी इन दोनों कार्यालयों से जुड़े दर्जनों पत्रकार बेरोजगार हो जाएंगे।  साभार : पूर्वांचलदीप

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