घमंडी डेस्क इंचार्ज को मिला सबक

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ये कहानी वर्ष 2011 के फरवरी महीने के किसी एक दिन की है. घमंडी डेस्क इंचार्ज को जबरदस्त सबक मिला एक दिन. बात है राजस्थान पत्रिका नामक अखबार समूह के बच्चा अखबार डेली न्यूज़ की. यहां पर एक जनरल डेस्क इंचार्ज महोदय काम करते हैं. इनका नाम कुछ भी मान लीजिए क्योंकि नाम देकर घटना को किसी एक व्यक्ति तक केंद्रित नहीं करना चाहते हम लोग. ऐसे डेस्क इंचार्ज कई स्वनामधन्य अखबारों के कई एडिशनों में पाए जाते हैं, बस, सबके नाम-वाम अलग होते हैं. ये श्रीमान अव्वल दर्जे के घमंडी और बदतमीज हैं.

वैसे तो इन्हें डेली न्यूज़ के फ्रंट पेज की ही जिम्मेदारी दी हुई है पर ये पूरे अखबार को ही अपनी संपत्ति समझते हैं. अपने जूनियर साथियों को छोटी छोटी बातों पर सार्वजनिक रूप से जलील करना इनकी आदत है. अगर किसी खबर में किसी शब्द की मात्रा भी छोटी बड़ी लग जाए तो ये रिपोर्टर या पेज बनवाने वाले पर ऐसे बरसते हैं जैसे उसने किसी का खून कर दिया हो. और जिस दिन खुद से कोई गलती हो जाती है उस दिन इनकी आवाज भी ऑफिस में नहीं सुनाई देती. एक बार तो इन्होंने फ्रंट पेज पर १९९८ के पोकरण परमाणु परीक्षण २००१ में करा दिए थे. मेरे पास इनकी ऐसी कई बड़ी बड़ी गलतियों {गलती नहीं ये तो गलते हैं} की लिस्ट मौजूद है.

ये उम्र में अपने से बड़ों का सम्मान करना भी नहीं जानते. सारा स्टाफ इनसे त्रस्त है. यदि आपका पत्रिका ग्रुप में कोई गुप्त सोर्स है तो आप मेरे दावे की पुष्टि भी करवा सकते हैं. अब मै आता हूँ उस घटना पर जिसने इन्हें इनकी औकात दिखा दी. ये घटना है ७ फ़रवरी सोमवार रात की. जैसा मैंने बताया ये दुष्ट सबको एक ही लाठी से हांकता है अतः उस दिन भी उसने चीफ रिपोर्टर के एक खास रिपोर्टर को जनरल डेस्क पर बुलाकर बुरी तरह जलील किया. यहां तक की उसकी योग्यता पर भी सवालिया निशान लगा दिए. और तो और, प्रबंधन द्वारा उसे दिए पुरस्कार के बारे में भी प्रश्न चिन्ह लगाया.

जैसे ही ये बात चीफ रिपोर्टर को पता लगी, वे बुरी तरह आग बबूला हो उठे (दरअसल वे डेस्क इंचार्ज द्वारा लम्बे समय से की जा रही उपेक्षा और अनादर से भी आहत थे). उन्होंने उसकी डेस्क पर जाकर उसकी जोरदार ऐसी तैसी की. सारा स्टाफ इकट्ठा हो गया डेस्क इन्चार्ज की पहली बार हवा खिसकते मैंने देखा. उस दिन के बाद से उस बड़बोले के व्यवहार में कुछ सुधार देखा गया. पर मै जानता हूँ कुत्ते की पूंछ आसानी से सीधी नहीं हो सकती.

मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि मेरे पत्र को जस का तस प्रकाशित करें, ताकि पत्रिका प्रबंधन को हमारी पीड़ा का पता चल सके. कुछ वरिष्ठ लोग डेली न्यूज़ में लम्बे समय काम करके पत्रिका गए हैं. पत्रिका प्रबंधन उनसे भी इसके व्यवहार की जानकारी ले सकता है. हालाँकि मैं अपना नाम बदलकर पत्र लिख रहा हूँ, पर मै जानता हूं आईपी एड्रेस से मेल ट्रेस की जा सकती है. पर मैं ये पत्र इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि मै जानता हूँ आप गोपनीयता के अपने सिद्धांत का हर हाल में पालन करते हैं. कृपया मेरा मेल एड्रेस प्रकाशित नहीं करें. आप पर कायम इस भरोसे के साथ, आपका एक पत्रकार मित्र.

चेतावनी : कानाफूसी कैटगरी की खबरें चर्चाओं, अफवाहों, कयासों पर आधारित होती हैं, जिसमें सच्चाई संभव है और नहीं भी. इसलिए इन खबरों को प्रामाणिक मानकर न पढ़ें. अगर कोई इसे प्रामाणिक मानकर पढ़ता है तो वो उसकी मर्जी व समझ पर निर्भर करता है और वह उसके लिए खुद जिम्मेदार है.


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