एक पत्रकार जो अधिकारियों के सामने पत्रकारों की मां-बहन एक करता है

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पत्रकार तो समाज का आईना होता है, शासन-प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करने, बुराईयों को उखाड़ फेंकने में अपनी अहम भूमिका निभाता है। अवाम को विश्‍वास भी पहले पत्रकारों द्वारा लिखी गयी खबरों पर होता था। लेकिन जैसे-जैसे पत्रकार अपना स्तर गिराते जा रहे हैं, उसी तरह से जनता का विश्वास भी कम होता जा रहा है।

चाटुकार और दलाल किसम के पत्रकार तो हर जगह होंगे लेकिन हमारे जिले के पत्रकारों ने जिस तरह से अधिकारियों की चटुकारिता कर अपना स्तर गिरा लिया है, ऐसा कहीं भी देखने को नहीं मिलता और अधिकारी भी यही चाहते हैं कि समाज को आईना दिखाने वाला लोकतंत्र का चौथा स्तंम्भ उनकी चटुकारिता करता रहे और उनका बैंक बैलेन्स बढ़ता रहे। सिर्फ यह यही नहीं एक पत्रकार तो पुलिस के एक बड़े अधिकारी के पास पूरे दिन ड्यूटी देते हैं और केबिन में बैठ जिले भर के दूसरे पत्रकारों की मॉ-बहन एक करते हैं।

आज आपको एक ऐसे महान पत्रकार से मिलवाउंगा जिसने उपने मान सम्मान को गिरवी रखकर पत्रकारिता को शर्मसार कर दिया है, लेकिन इसे आज तक शर्म नहीं आयी, और लगता भी नहीं कि कभी इसे शर्म आयेगी। यह अपने को एक एजेन्सी का संवाददाता बताता है और है भी, लेकिन इसका पत्रकारिता और पत्रकार से कोई वास्ता नहीं। सुबह आफिस टाइम पर यह अपनी 10 टके की घटिया पुरानी स्कूटर पर निकलता है, जो इसे ईमानदार साबित करने का प्रयास करती है। घर से निकलते ही यह साहब कहीं और जाने के बजाय सीधे डीआईजी आफिस का रूख करते है और सारा दिन वहीं बैठे-बैठे गुजार देते हैं। इतना लाभ इन्हें जरूर मिलता है कि शाम को वापस आते वक्त कुछ सब्जी आदि की व्यवस्था इसी आफिस से हो जाती है। और कभी किसी की पैरवी कर अच्छी रकम भी कमा लेते हैं, यह साहब गज़ब के सेटिंगबाज हैं, जैसे ही कोई नया कप्तान या डीआईजी जिले में आता है इनका मुरीद हो जाता है। इनके अन्दर कौन सी कला है यह कोई नहीं जानता। लेकिन पिछले कप्तान साहब ने तो इन्हें बेइज्जत करके आफिस से बाहर निकलवा दिया था। वही कप्तान साहब इस बार डीआईजी के रूप में आये हैं, जिससे इनकी सेटिंग की दुकान एकबार फिर चल पड़ी है। और आजकल पूरा दिन डीआईजी साहब के चेंबर में ही गुजरता है।

4 मार्च की बात है डीआईजी साहब के सामने जिले के कुछ पत्रकार बैठे थे। उस समय यह महाश्‍य भी वहां मौजूद थे। डीआईजी साहब ने इच्छा जाहिर किया कि गोरखपुर में प्रेस क्लब होली के अवसर पर एक कार्यक्रम आयोजित करता है ऐसा कार्यक्रम यहां भी होना चाहिये। वहां मौजूद  एक हिंदी दैनिक के पत्रकार ने कहा कि यहां प्रेस क्लब के पास कोई बजट नहीं है और न ही कोई अधिकारी ही सपोर्ट करता है, पत्रकारों के पास इतना पैसा कहां है इसलिये ऐसा कार्यक्रम मुमकिन नहीं है। इस पर डीआईजी साहब ने कहा कि पैसे की व्यवस्था हो जायेगी। लेकिन वहां मौजूद सेंटिंगबाज पत्रकार महोदय, जो सरकारी पत्रकार के नाम से मशहूर हैं, अपने को बड़ा साबित करने के चक्कर में कह दिया कि इस जिले के पत्रकार बहुत मा...द...र... हैं। सरकारी पत्रकार महोदय की इस गाली से जिले के पत्रकार बहुत आहत हैं। लेकिन जिले के दूसरे पत्रकार वहां मौजूद अन्‍य पत्रकारों पर भी दांत पीस रहे हैं, जो वहां सबकुछ चुपचाप सुन लिए! जब जिले भर के पत्रकारों की मॉ बहन उक्‍त सरकारी पत्रकार द्वारा तौली जा रही थीं।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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