आगरा की महिला रिपोर्टर के उत्‍पीड़न के मामले में सोया है हिंदुस्‍तान

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: एक वरिष्‍ठ पत्रकार पर दैहिक शोषण का आरोप : शहर भर में जागो आगरा का नारा बुलंद करने वाला हिन्दुस्तान का प्रबंध तंत्र महिला उत्पीड़न के मामले में सोया हुआ है। एक स्ट्रिंगर महिला पत्रकार न्याय की आस में है, लेकिन उसकी फरियाद को सुना नहीं जा रहा है। इस महिला पत्रकार का दैहिक शोषण करने वाले हिन्दुस्तान आगरा के वरिष्ठ पत्रकार की जांच में हिन्दुस्तान प्रबंधतंत्र ने सिर्फ औपचारिकता ही निभाई है।

आगरा कार्यालय में जांच के लिए पहुंचे कार्यकारी संपादक सुंधाशु श्रीवास्तव के सामने पहले से ही तैयार गवाह पेश किए गए। उनकी गवाही भी पहले से ही तय कर दी गई थी। चूंकि अधिकारियों का आदेश था इसलिए कोई खुलकर नहीं बोला। पीड़ित महिला पत्रकार से बात करना किसी ने भी जरूरी नहीं समझा। उल्टे उसको बदनाम करने और गलत ठहराने के लिए अभियान छेड़ दिया गया है। आफिस के लोगों से लगातार कहा जा रहा है कि वे आरोपी सीनियर पत्रकार को निर्दोष साबित करने संबंधी बयान दें।

भोपाल के सिटी भास्कर की खबरें हूबहू प्रकाशित किए जाने के संबंध में भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। हिन्दुस्तान प्रबंधन की चुप्पी आगरा के मीडिया जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। हिन्दुस्तान कार्यालय में भी माहौल तनावपूर्ण और बोझिल हो चुका है। महिला पत्रकार और उसकी मां द्वारा पूरे भरे ऑफिस में 24 जनवरी को दोपहर 2 बजे किए गए हंगामे को बीते भले ही एक माह से ज्‍यादा समय हो गया हो, लेकिन कार्यालय में इसको लेकर कानाफूसी और कौन सही और कौन गलत है का दौर जारी है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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