ईटीवी को कर्मचारियों की नहीं, छुट्टी की चिंता है!

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यशवंतजी, एक पक्‍की खबर है ईटीवी से. यहां बड़ी संख्‍या में कॉपी एडिटर/रिपोर्टर ईएसआई से लिखवाकर लीव पर जा रहे हैं. शायद ईटीवी ही ऐसा मीडिया आर्गेनाइजेशन होगा, जहां के 95 प्रतिशत कर्मचारी ईएसआई के दायरे में हैं, यानी की उनकी सेलरी 15000 रुपये प्रतिमाह से कम है. बिहार डेस्‍क से 7 लोग होली की छुट्टी पर हैं वो भी ईएसआई पर, राजस्‍थान के 4 लोग, यूपी और एमपी डेस्‍क का भी यही हाल है.

दरअसल सरकार ने जैसे ही ईएसआई का दायरा 10000 रुपये से 15000 रुपये किया, यहां के अधिकांश स्‍टॉफ इसके दायरे में आ गए. इससे लोगों का सिक लीव यानी एसएल खतम हो गया, जो साल में 12 मिलता है. अब कर्मचारी करें भी तो क्‍या करें? उसके पास इसके अलावा कोई चारा नहीं है.

ईटीवी की सेलरी के बारे में तो सब जानते ही हैं कि यहां कर्मचारी का कैसे शोषण होता है. वैसे इस सिचुएशन से घबराकर मैनेजमेंट ने सबकी सेलरी कम से कम से कम 15000 रुपये करने का मन बनाया है. जिससे लोग छुट्टी कम ले सकें. यहां चिंता कर्मचारी की नहीं, छुट्टी की है.

एक खबर और है जिसकी पुष्टि नहीं हो पाई है, वो ये कि लेबर डिपार्टमेंट ने ईटीवी से कर्मचारियों की सेलरी बढ़ाने के लिए कहा है. क्‍योंकि ईएसआई का पैसा सरकार को ही देना पड़ता है. इन तमाम प्रेशर और महंगाई के बाद भी ईटीवी में सेलरी बढ़ाने की अफवाह ही उड़ी है, होता कुछ नहीं. धन्‍यवाद.

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.

नोट- कानाफूसी कैटगरी की खबरें चर्चाओं और कयासों पर आधारित होती हैं. इनकी विश्वसनीयता पर भरोसा करने से पहले खुद एक बार इन चर्चाओं की पुष्टि करें और फिर हमें भी सूचित करें, नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए.


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