होली का हुड़दंग पिचकारी बाबा संग

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होली ना कोई साजन ना कोई गोरी... खेले मशाने में होली दिगंबर...खेले मशाने में होली... आप सभी बंधू-बांधवों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं. खैर होली का त्यौहार जहाँ सम्पूर्ण जहाँ में जोश और उल्लास का रंग भरता हैं वही इस जोश से पत्रकार और टीवी चैनल के मालिकान भी अछूते नहीं रहते. होली की बात हो और भोजपुरिया रंग की बात ना हो तो होली का मज़ा कुछ अधूरा सा लगता है और अगर भोजपुरिया टीवी इंडस्‍ट्री की बात की जाये तो सबसे पहला नाम आता है लइया का.

जैसा की इस चैनल का नाम है, जी बिलकुल रसिक रस से से ओत-प्रोत. लोगों का कहना है कि इसके मालिक श्री पिचकारी भी कुछ इसी रस के फेन है और 60 बसंत पार कर जाने के बाद भी प्रेम रस का स्वादन करने में अच्छे-अच्‍छे नवयुवकों को पीछे छोड़ देते है. पिचकारी बाबा होली के अवसर पर गाने-बजाने का अच्छा इन्तजाम अपने दर्शकों के लिए करते थे. खूब मस्ती होती थी. भोजपुरी फिल्म की नायिकाएं पिचकारी बाबा के लिए खूब ठुमके लगाती थी, लेकिन इस बार लइया पर होली का रंग अभी तक नहीं चढ़ा है और जानकारों का कहना है कि इस बार शायद रंग चढे  भी ना.

कारण बताते हैं कि होली के पहले ही कुछ सरकारी लोगों ने पिचकारी जी के तमाम  ठिकानों पर 48 घंटे से ज्‍यादा देर तक फाग गाया और इस फाग की हर थाप पिचकारी बाबा की दिल की धड़कन को उनके चार्टर प्लेन से भी ज्यादा गति से धौंकने को मजबूर कर रही थी. वैसे पिछले पूरे साल जहाँ बाबा पिचकारी अंखियों की झरोखों में अपनी छवि निहारते रहे तो वहीं दूसरी ओर अपने कर्मचारियों को होली की गुब्बारे की तरह उठा-उठा कर चैनल के बाहर फेंकते रहे. लगता है कोई ऐसा ही गुब्बारा पलट कर पिचकारी जी को ही लग गया और परिणाम स्वरुप सरकारी गायक बाबा पिचकारी के यहां फाग गाने आ गए.

खैर हम तो दुआ करेंगे कि श्री श्री बाबा पिचकारी जी कम से कम होली वाले दिन आँखों की झरोखों से निकल कर अपनी छवि का दर्शन अपने सामान्य कर्मियों को भी करा दें. वैसे सरकारी फाग सुनाने के बाद पिचकारी बाबा के चेहरे का रंग इस होली पर उतरा नज़र आ रहा है, लेकिन बाबा कोई बात नहीं...होली है. आप भी जम कर फाग गायें और आपके लिए अगर इजाजत हो तो एक-दो फाग आपके पेश-ए-खिदमत कर देता हूं, जो शायद आपके बिहार के भोजपुरी दर्शकों को भी पंसद आ जाएगा. बुढ़वा नन के छिनार... बुढ़वा नन के छिनार... धेनकवे में बंद ह टिकुरिया... बुरा न मानो होली है.

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.

बुरा न मानो होली है


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